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कर्म से ही बनती है कुंडली-मुनि सुधाकर

मंत्र साधना से अनिष्ट ग्रहों का निवारण

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कर्म से ही बनती है कुंडली-मुनि सुधाकर

कर्म से ही बनती है कुंडली-मुनि सुधाकर

बेंगलूरु. मुनि सुधाकर उपनगर में विहार करते हुए बसवनगुड़ी पहुंचे। मुनि ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा मानव के मन मस्तिष्क पर ग्रह नक्षत्रों का अमिट प्रभाव देखा जाता है। जीवन के विचार व व्यवहार भी इनसे प्रभावित होते हैं। सफलता, असफलता, सुख दुख व जीवन की बदलती परिस्थितियों में भी यह जिम्मेदार हंै। ब्रह्माण्ड की बदलती परिस्थितियों में भी इनका प्रभाव देखा जाता है। मुनि ने अष्ट कर्म व नवग्रहों के तुलनात्मक अध्ययन की प्रेरणा देते हुए कहा कर्म ग्रह वह नक्षत्र की स्व के लिए रचना स्व की प्रवृत्ति विचार से होती है। व्यक्ति जैसे कर्म करते हैं वैसे ही उसकी कुंडली बन जाती है। मुनि ने कहा हमें पुरुषार्थवादी और कर्मवादी बनना चाहिए पुरुषार्थ के द्वारा एक सीमा तक भाग्य का बदलाव संभव हो सकता है। संसार में सभी प्राणियों का अस्तित्व समान है सब में विकास की असीम संभावना है। जैन दर्शन नियंता को नहीं मानता नियमों का साम्राज्य स्वीकार करता है। विश्व की सारी व्यवस्था कतिपय सार्वभौम नियमों से अनुशासित है। हर मनुष्य अपने भविष्य का निर्माण स्वयं करता है आज आशीर्वाद की संस्कृति के नाम पर समाज में नाना प्रकार के अंधविश्वास पनप रहे हैं। यह मानवता के लिए खतरा है। हमारी साधना में भौतिक वाद का बहुत महत्व है पर भक्ति का स्वरूप याचना प्रधान ना होकर प्रेरणा प्रदान हो ना चाहिए। मुनि ने कहा नवग्रहों के अनिष्ट प्रभाव को दूर करने के लिए जीवन शैली को व्यवस्थित बनाना जरूरी है। बड़ों का सम्मान, सत्य का सदाचारण, नियमों की परिपालना, धार्मिक व आध्यात्मिक भावना, व ग्रहों से संबंधित मंत्र व अनुष्ठान के द्वारा अनिष्ट प्रभाव को दूर किया जा सकता है। जैन दर्शन कर्म संक्रमण के सिद्धांत में विश्वास करता है। व्यक्ति अपने कर्मो के परिणामों को बदल भी सकता है। शुभ प्रवृत्ति से पाप कर्म भी पुण्य कर्म में बदल जाते हैं। इस अवसर पर युवक परिषद मंत्री धर्मेश कोठारी ने बताया कि आज मुनि का प्रवास तेरापंथ सभा मंत्री हरकचंद ओस्तवाल के यहां रहेगा। इस अवसर पर युवक परिषद से सहमंत्री अंकुश बैद, नवरत्न बरडिय़ा, देवेंद्र अंचलिया, प्रमोद श्रीश्रीमाल, मुकेश नाहर, जितेंद्र गौशल की उपस्थिति रही। मुनि का गांधी नगर प्रवास बुधवार को रहेगा।

मुनि को विशेषांक की प्रति भेंट
बेंगलूरु. अणुव्रत की साधना मानव मात्र के लिए कल्याणकारी होती है। जैन मुनि सुधाकर के सान्निध्य में बसवनगुड़ी में आचार्य महाप्रज्ञ अभिलेख अनुव्रत विशेषांक मुनि को संघ संवाद के संपादकीय सदस्य जितेंद्र घोषाल, तेरापंथ सभा के मंत्री हरकचंद ओस्तवाल, युवक परिषद मंत्री धर्मेश कोठारी, सह मंत्री अंकुश बैद, गौतम दक ने भेंट किया। मुनि ने कहा अणुव्रत के सिद्धांत मानव मात्र के लिए कल्याणकारी है महाप्रज्ञ अभिलेख आचार्य महाप्रज्ञ के जीवन दर्शन पर प्रभाव डालने वाला एक विशेष विशेषांक है।