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बड़े हिस्से पर हो खतरे का चित्र

प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तंबाकू उत्पादों की सचित्र चेतावनी पर केंद्र सरकार से कड़ा रूख अख्तियार करने का अनुरोध किया

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Shankar Sharma

Jan 23, 2016

bangalore photo

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बेंगलूरु.
प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तंबाकू उत्पादों की सचित्र चेतावनी पर केंद्र सरकार से कड़ा रूख अख्तियार करने का अनुरोध किया है। आयोग ने 'एम-नशा उन्मूलन' मोबाइल एप्लीकेशन कन्नड़ भाषा में उपलब्ध कराने की अपील की है।


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी.नड्डा और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर को भेजे पत्र में आयोग की अध्यक्ष डॉ. कृपा अमर अल्वा ने तंबाकू उत्पादों के पैकेट्स के बड़े हिस्से पर सचित्र चेतावनी को अनिवार्य करने की वकालत की है। तंबाकू उत्पादों के पैकेटों के 85 फीसदी हिस्से पर प्रस्तावित सचित्र चेतावनी को फौरन लागू किया जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी पैकेटों के 85 फीसदी हिस्से पर सचित्र चेतावनी की सिफारिश की है।

उन्होंने कहा कि 2013 के एक अध्ययन के अनुसार 53 फीसदी भारतीय तंबाकू के ब्रांड पर पहले नजर डालते हैं जबकि 28 फीसदी लोग ही पैकेट्स पर छोटे-छोटे अक्षरों में अंकित स्वास्थ्य संबंधित चेतावनी को पढ़ते या देखते हैं। ऐसे में पैकेटों के 85 फीसदी हिस्से पर सचित्र चेतावनी हो तो तंबाकू उपभोक्ता हतोत्साहित होंगे।

इंडोनेशिया, थाइलैंड, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित कई दक्षिण एशियाई देश पैकेटों के 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सों पर सचित्र चेतावनी छाप रहे हैं।इसलिए भारत को भी परेशानी नहीं होनी चाहिए। डॉ. अल्वा ने खत में केंद्र सरकार से अपील की है कि भारत को तंबाकू मुक्त बनाने और तंबाकू छोडऩे वाले लोगों की मदद के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो 'एम-नशा उन्मूलनÓ मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च की है, उसे कर्नाटक के लोगों के लिए कन्नड़ में भी उपलब्ध कराया जाए। वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण के अनुसार कर्नाटक के 41 फीसदी लोग लंबाकू छोडऩा चाहते हैं।