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बसव जयंती पर लिंगायत कार्ड भुनाने में जुटे नेता

शाह संत बसवेश्वर को माला नहीं पहना पाए जबकि येड्डियूरप्पा माला पहनाने में सफल रहे

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बेंगलूरु. विधानसभा चुनाव से पहले इस बार संत बसवेश्वर की जयंती पर राजनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण रही। चुनाव की घोषणा से ऐन पहले सिद्धरामय्या सरकार के लिंगायत और वीरशैव लिंगायत को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने के फैसले के कारण इस बार १२वीं सदी के समाज सुधारक की जयंती पर नेताओं में बसवण्णा को याद करने की होड़ रही।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बेंगलूरु में बसवेश्वर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की तो विदेश दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन में बसवण्णा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। संयोगवश, वर्ष 2015 के ब्रिटेन दौरे के दौरान मोदी ने ही लंदन में स्थापित बसवण्णा की प्रतिमा का अनावरण किया था। कांग्रेस नेता भी बसवण्णा को याद करने में पीछे नहीं रहे।

मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने मैसूरु में महल परिसर के पास स्थित बसवेश्वर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉजी परमेश्वर और ऊर्जा मंत्री डी.के. शिवकुमार, बेंगलूरु विकास मंत्री के.जे. जार्ज, गृहमंत्री रामलिंगा रेड्डी नेताओं ने बेंगलूरु के बसवेश्वर चौराहे पर संत बसवण्णा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद शाह, केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।


हंगामे की कोशिश नाकाम
शाह के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले लिंगायत महासभा के कार्यकर्ताओं ने बसवेश्वर चौराहे पर विरोध प्रदर्शन किया और शाह से लिंगायतों के अल्पसंख्यक दर्जे के मसले पर भाजपा का रूख साफ करने की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर स्थिति को संभाला।


दिल जीतने की कोशिश
करीब 17 फीसदी आबादी वाला लिंगायत समुदाय प्रदेश का सबसे बड़ा जातीय समूह है और चुनाव में हर दल इस समुदाय का दिल जीतने की कोशिश कर रहा है। मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और शाह ने कन्नड़ और अंग्रेजी में ट्वीट कर बसव जयंती की बधाई दी। मोदी ने बधाई संदेश वाले ट्वीट के साथ लंदन में बसवण्णा के प्रतिमा अनवारण से जुड़े समारोह का पुराना वीडियो भी साझा किया। दोनों दलों के अन्य कई नेताओं ने भी बसव जयंत पर ट्वीट किए।

बसवण्णा को माला पहनाने में चूके शाह
इस दौरान शाह संत बसवेश्वर को माला नहीं पहना पाए जबकि येड्डियूरप्पा माला पहनाने में सफल रहे। संत बसवण्णा की अश्वारुढ़ प्रतिमा काफी ऊंची थी जिसकी वजह से दोनों नेताओं के माल्यार्पण के लिए क्रेन की व्यवस्था की गई थी। क्रेन के प्रतिमा से थोड़ी दूर होने के कारण शाह ने प्रतिमा के गले में जब उछालकर माला पहनाने की कोशिश की तो माला फिसलकर नीचे गिर गई लेकिन येड्डियूरप्पा प्रतिमा के गले में ठीक से माला पहनाने में सफल रहे। इस पर दोनों हंस पड़े।