
दादाओं के बाद पौत्रों की लड़ाई, बदलेगा इतिहास या दोहराएगा!
बेंगलूरु. करीब ढाई दशक पहले वर्ष 1999 के लोकसभा चुनावों में जब पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा को पूर्व मंत्री जी पुट्टस्वामी ने हासन में चुनौती दी थी तो, राष्ट्रीय स्तर पर उसकी चर्चा हुई। चुनावों में पुट्टस्वामी ने देवगौड़ा को 1.41 लाख से शिकस्त देकर इतिहास रच दिया।
अब, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों उन दोनों कद्दावर नेताओं के पौत्र हासन में आमने-सामने हैं। एचडी देवगौड़ा के पौत्र प्रज्वल रेवण्णा एनडीए उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं तो पुट्टस्वामी के पौत्र श्रेयस एम.पटेल कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंक रहे हैं। वर्ष 2019 में प्रज्वल ने कांग्रेस-जद-एस गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और यहां से जीत हासिल की थी।
प्रज्वल रेवण्णा को इस लोकसभा चुनाव में अपने दादा एचडी देवगौड़ा के करिश्मे पर काफी भरोसा है। देवगौड़ा का अभी भी इस निर्वाचन क्षेत्र में काफी दबदबा है। लेकिन, पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें विश्वास में नहीं लिया। इसलिए इस बार उन्हें कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। जद-एस के शीर्ष नेता भी इस बार प्रज्वल की संभावनाओं को लेकर चिंतित है। हासन लोकसभआ निर्वाचन क्षेत्र के लोगों विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि, प्रज्वल ने उनकी समस्याओं को काफी हद तक नजरअंदाज किया। जब लोकसभा चुनाव करीब आए तो एक साल पहले क्षेत्र का दौरा करना शुरू किया।
गठबंधन की कामयाबी पर टिकी उम्मीदें
हालांकि, भाजपा के एक नेता ने कहा कि, गठबंधन का फायदा प्रज्वल को मिलेगा। भाजपा वोटों का एक बड़ा हिस्सा और मोदी लहर का फायदा भी उन्हें मिलेगा। अगर दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता उनके लिए लगन से काम करें तो वह फिर एक बार चुनाव जीत सकते हैं। हालांकि, प्रज्वल रेवण्णा की अब तक हुई सार्वजनिक सभाओं में भाजपा नेता या कार्यकर्ता शामिल नहीं हुए। इससे जमीनी स्तर पर दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं के मेल-जोल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रज्वल रेवण्णा के पिता एचडी रेवण्णा भाजपा विधायक प्रीतम गौड़ा से कई बार मिलने पहुंचे और उनका समर्थन भी मांगा। हालांकि, बीवाइ विजयेंद्र और सदानंद गौड़ा जैसे भाजपा नेता उनके नामांकन में शामिल होने पहुंचे लेकिन, अभी भी दोनों दलों के कार्यकर्ताओं का आपसी सहयोग गठबंधन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
पटेल की पार्टी और समाज में व्यापक स्वीकार्यता
उधर, श्रेयस एम.पटेल को अप्रत्याशित रूप से कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाकर प्रज्वल की मुश्किलें खड़ी कर दीं। श्रेयस युवा नेता हैं और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों में व्यापक स्वीकार्यता है। श्रेयस वीरशैव लिंगायत और दास वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि, उन्हें दोनों समुदायों के मत मिलेंगे। कुरुबा और इसाइयों के मत भी पटेल के पक्ष में जा सकते हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों में पटेल होलेनरसिंहपुर से एचडी रेवण्णा के खिलाफ चुनाव लड़े थे लेकिन, मामूली अंतर से हार गए।
स्थानीय असंतोष बड़ी चुनौती
जिले के अधूरे कार्यों विशेषकर, हासन शहर में फ्लाइओवर के अधूरे निर्माण से लोगों में असंतोष है। इस लोकसभा क्षेत्र से देवगौड़ा पांच बार चुनाव जीते। वर्ष 2004 से 14 तक उन्होंने लगातार जीत दर्ज की जबकि, 2019 में सीट प्रज्वल के लिए छोड़ा तो वे भी आसानी से जीत गए। लेकिन, इस बार श्रेयस पटेल से कड़ी टक्कर है और सभी की नजर इस बात पर है कि क्या फिर एक बार 1999 का इतिहास दोहराया जाएगा?
Published on:
08 Apr 2024 12:14 pm
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
