
भक्तिभाव से मना भगवान धर्मनाथ का जन्म कल्याणक
बेंगलूरु. जयनगर के राजस्थान जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में मूल नायक धर्मनाथ भगवान के जन्म कल्याणक पर गुरुवार सुबह शक्रस्तव अभिषेक महापूजन का आयोजन आचार्य देवेंद्रसागर सूरी, आचार्य उदयप्रभसूरी, मुनि उदयरत्न की निश्रा में किया गया। देवाधिदेव धर्मनाथ भगवान के जन्म कल्याणक पर धर्मनाथ भगवान की पूजा-अर्चना करते हुए श्रद्धालुओं ने विश्व मंगल व कल्याण की प्रार्थना करते हुए सबके सुख-समृद्धि की कामना की। आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने कहा कि हमें परमार्थ की उपलब्धि नहीं होने से परेशानी होती है, हमें मंदिर बनाने से पहले अपना मकान बनाने पर विचार आता है। आचार्य ने गृहस्थ जीवन पर भी अपने प्रवचन में कई विषय समाहित किए। उन्होंने कहा कि गृहस्थ में सुख समृद्धि चाहिए, नकारात्मक ऊर्जा नहीं हो इसलिए जन्म कल्याणक का अभिषेक करना चाहिए। उन्होंने अभिषेक करने का महत्व बताया, उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए सभी कर्म स्वाधिष्ठान चक्र में संग्रहित होते हैं। यह चक्र जल तत्व से बना है। जब भी हम कोई बुरा काम करते हैं, तो वह हमारे शरीर के जल चक्र को प्रदूषित करता है। चूंकि जल तत्व पर ही व्यक्ति की व्यक्तिगत, स्वास्थ्य, संपत्ति और आध्यात्मिक उन्नति आधारित होती है, इसलिए जल तत्व के बुरे कर्म ग्रहण करते ही उसके पूरे जीवन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। जाने-अनजाने में गलत काम करके व्यक्ति अपना ही नुकसान कर रहा होता है। ऐसे में जब कोई व्यक्ति भगवान का जल से अभिषेक करता है तो उसके स्वाधिष्ठान चक्र में प्रदूषित हुआ जल तत्व, परमात्मा पर जाप के साथ अभिषेक किए जा रहे जल से एकाकार हो जाता है। इस तरह परमात्मा के अभिषेक के साथ ही जल तत्व की शुद्धि हो जाती है और व्यक्ति का मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक उत्थान होता है। आयोजन में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साह से भाग लेते हुए प्रभु भक्ति का लाभ लिया।
Published on:
04 Feb 2022 07:20 am
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