
लोस-विस उपचुनाव : पांच राज्यों में मतदान से पहले राज्य के मतदाताओं का पता चलेगा रुझान
बेंगलूरु. पांच राज्यों में नवम्बर-दिसम्बर में होने वाले विधानसभा चुनाव को आम चुनाव का सेमी फाइनल मुकाबला माना जा रहा है तो इन राज्यों में मतदान से ठीक पहले कर्नाटक मेंं विधानसभा और लोकसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव के नतीजों पर भी राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हैं। सत्तारुढ़ जद-एस और कांग्रेस गठबंधन के साथ ही विपक्षी भाजपा के लिए लोकसभा व विधानसभा उपचुनाव राजनीतिक अग्नि परीक्षा के समान होंगे।
एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार के सत्ता संभालने के बाद पिछले चार महीने के दौरान हुए शहरी निकायों और विधान परिषद चुनाव में गठबंधन का पलड़ा भारी रहा है। विजयपुर स्थानीय निकाय कोटे की विधान परिषद सीट के उपचुनाव में भाजपा को झटका लगा था। यह सीट कांग्रेस ने भाजपा से छीन ली थी। विधान सभा से विधान परिषद की तीन सीटों के उपचुनाव में सत्तारुढ़ गठबंधन संख्या बल के सहारे बढ़त हासिल करने में सफल रहा। पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण भाजपा ने उम्मीदवार नहीं उतारा था और गठबंधन के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए। कांग्रेस के असंतुष्टों को लुभाकर सरकार गिराने की भाजपा की कोशिश भी रंग नहीं ला पाई। बेंगलूरु महापौर के चुनाव में भी गठबंधन का पलड़ा भारी रहा। गठबंधन के लिए उपचुनाव में बढ़त बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा तो भाजपा के लिए गठबंधन को मात देना आसान नहीं होगा।
मई में हुए विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बावजूद सत्ता से दूर रहने को मजबूर भाजपा इन उपचुनावों में सत्तारुढ़ गठबंधन को मात देने की तैयारी कर रही है जबकि कांग्रेस और जद-एस इन उपचुनावों में लोकसभा की तीन में से दो सीटें जीत कर आम चुनाव से पहले मोदी विरोधी लहर बनाने की तैयारी में है। लोकसभा की जिन तीन सीटों के लिए उपचुनाव होना है उनमें से दो पर वर्ष २०१४ के चुनाव में भाजपा जीती थी जबकि एक जद-एस ने जीती थी। इसमें से शिवमोग्गा भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है जबकि मण्ड्या को जद-एस का मजबूत सियासी किला माना जाता है। कांग्रेस बल्लारी में भाजपा को चुनौती देने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि भाजपा को कड़ी चुनौती मिले और उसकी कुछ सीटें गठबंधन की झोली में आए। इससे लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बनाने में मदद मिलेगी।
अगर गठबंधन अपनी सीटें बचाने के साथ भाजपा से कुछ सीटें छीनेंगी तो उससे लोगों में गठबंधन को लेकर अच्छा संकेत जाएगा। जद-एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने उपचुनाव की घोषणा के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गठबंधन साथ मिलकर उपचुनाव का सामना करेगा।
देवेगौड़ा ने कहा कि हम पूरी एकजुटता और ताकत से मैदान में उतरेंगे। देवेगौड़ा ने उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा आलाकमान ने प्रदेश नेताओंं को आम चुनाव में लोकसभा की २८ में से २० से २५ सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है। इसके कारण पार्टी के प्रदेश नेताओं पर उपचुनाव में भी बेहतर प्रदर्शन को लेकर दबाव है।
Published on:
07 Oct 2018 05:38 pm

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