11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

प्रेम ही राम राज्य का मूल तत्व: डॉ. अली

साहित्यिक चर्चा, नाट्य प्रस्तुति व गीतों के साथ मनाया पत्रिका का स्थापना दिवस

3 min read
Google source verification
patrikaaa.jpg

बेंगलूरु. राजस्थान पत्रिका, बेंगलूरु के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राजस्थान पत्रिका व अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था के संयुक्त तत्वावधान में राम और राम के आदर्शों पर चर्चा की गई। राम और हम विषय पर शहर के प्रबुद्ध जनों ने विचार व्यक्त करते हुए जहां उन्हें भारतीय संस्कृति का प्राण बताया, वहीं उनके आदर्शों को अपनाने पर जोर दिया। जे.सी. रोड स्थित जैन विश्वविद्यालय के सभागार में मुख्य अतिथि के रूप में पटना से विभा रानी श्रीवास्तव व विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली से वरिष्ठ साहित्यकार पुनीता सिंह उपस्थित रहीं।

गायिका मोना सिंह ने गणेश स्तुति और पल्लवी शर्मा व ममता मावंडिया ने ध्येय गीत की प्रस्तुति दी। वरिष्ठ समालोचक व साहित्यकार डॉ इसपाक अली ने मर्यादा पुरुष राम के व्यक्तित्व को दार्शनिक व मनोवैज्ञानिक पहलुओं के आधार पर आधुनिक युग के शैक्षिक, सामाजिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि रामराज्य के मूल तत्व को समझना चाहिए। प्रेम ही राम राज्य का मूल तत्व है। किसी भी तरह के भेद के बिना सभी के लिए प्रेम है। उन्होंने शबरी, वानरों, गिध्द, केवट सबको प्रेम बांटा।

कवयित्री पुनीता ने कविता के माध्यम से राम की महिमा सुनाई। साहित्यकार विभा रानी श्रीवास्तव ने कविता में राम के प्रति भक्ति को अभिव्यक्त किया।समाजसेवी व हास्य कवि डॉ सुनील तरुण ने राम और रावण के मध्य के भेद को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कहां राम और कहां हम। हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। संस्था के मुख्य सलाहकार डॉ प्रेम तन्मय ने राम शब्द की व्याख्या करते हुए उसे भारतीयता का प्राण तत्व बताया। उन्होंने र शब्द के तरंगों की मोहक व्याख्या की और कहा कि यह शब्द हमारी ऊर्जा के उर्ध्वगमन में सहायक है।

अभ्युदय की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. इंदु झुनझुनवाला ने अपनी बात छन्द मुक्त कविताओं में प्रस्तुत की। राम की व्यथा और रावण के दस सिर का उल्लेख करते कहा कि वास्तव में राम और रावण दोनों हमारे भीतर हैं। सूर्यरूपी राम (गुण) के उदय से तम रूपी रावण का स्वयं ही विनाश हो जाता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजस्थान पत्रिका, बेंगलूरु के सम्पादकीय प्रभारी जीवेन्द्र झा ने कहा कि राम तो भारतीय जन मानस के हृदय में स्थापित हैं। उनकी पूजा का अर्थ उनके गुणों को आत्मसात करना है। उन्होंने राजस्थान पत्रिका में साहित्य और समाज के अन्योन्याश्रित सम्बन्ध पर भी चर्चा की और इस संयुक्त तत्वावधान के आयोजन व राष्ट्रीय हित में अभ्युदय के प्रयासों की सराहना की।इस मौके पर अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय की ओर से वर्ष 2023 का महिला प्रतिभा सम्मान विभा रानी श्रीवास्तव को प्रदान किया गया। इसके पहले संस्था के संरक्षक कमल किशोर राजपूत ने स्वागत करते हुए कहा कि अखबारों की अहमियत किसी से छिपी नहीं है। जनमत बनाने और जनता को जागरूक करने में समाचार पत्रों की अहम भूमिका रही है। राजस्थान पत्रिका का ढेर सारे अखबारों में अपना अलग ही गरिमापूर्ण स्थान है।

अस्थि चर्म मय देह मम...

इस मौके पर संत तुलसीदास के जीवन पर आधारित लघु नाटिका रामबोला की प्रस्तुति ने लोगों को सांसारिक सुखों की नश्वरता व भक्ति की शक्ति से परिचय कराया। डॉ इन्दु झुनझुनवाला निर्देशित लघु नाटिका में मुख्य कलाकार में रामबोला की भूमिका में बाल रूप में तृष्या गुप्ता व संत तुलसी की भूमिका में पल्लवी शर्मा, हुलसी के रूप में बबीता चमडिया ने अभिनय किया तो भगवती सक्सेना ने आत्माराम दूबे की भूमिका, ज्योति तिवारी ने रत्नावली, ब्रजेन्द्र मिश्र ने नरहरि दास, दिया तिवारी ने राम तथा धायममां चुनिया की भूमिका ममता मावंडिया ने निभाई। सभी कलाकारों ने भावप्रवण अभिनय किया। रत्नावली का उलाहना तुलसीदास के जीवन को रूपांतरित कर गया। संचालक की भूमिका स्वीटी सिंघल ने निभाई।

मिथिलांचल से लेकर अवध तक के लोकगीत गूंजे

कार्यक्रम के तीसरे सत्र में कविताएं व गीत प्रस्तुत किए गए। पल्लवी शर्मा ने ए पाहुना एहीं मिथिला में रहू ना गाते हुए मिथिलांचल की मान-मनुहार की संस्कृति को जीवंत किया। ज्योति तिवासी ने राम के आगमन पर पलक पांवड़े बिछाए। गीता चौबे गूंज ने अवध में खुशियां मनाईं तो उस रूप की महिमा गाते हुए स्वीटी सिंघल ने तालियां बटोरीं। कवि सुशील कुमार ने राम का भक्त हूं कविता प्रस्तुत की, तो विनीता मिश्रा ने अपने भाव पुष्प समर्पित किए। भगवती सक्सेना, रुचि अग्रवाल, संस्था की सह अध्यक्ष रितु अग्रवाल ने प्रस्तुति दी। डॉ सुनील तरुण ने रचनाकारों को प्रोत्साहित किया। संतोष पाण्डेय ने बांसुरी की धुन पर राम आएंगे सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने चर्चा में सूत्रधार की भूमिका भी निभाई। समापन में कमल किशोर राजपूत ने धन्यवाद दिया।