
मिशन चंद्रयान-2 पर वैज्ञानिकों की विशेष बैठक
बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा के लिए इसरो मुख्यालय में शीर्ष वैज्ञानिकों की एक बैठक बुलाई। इस बैठक में इसरो वैज्ञानिकों के अलावा देशभर के विभिन्न शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों से आए 70 वैज्ञानिक शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता इसरो अध्यक्ष के.शिवन ने की।
इसरो की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार बैठक में चंद्रमा पर हुए अब तक के अध्ययनों और खोजों पर चर्चा हुई तथा भविष्य के मिशन से जुड़े कई पहलुओं का गहराई से विश्लेषण हुआ। इसमें चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी, वाष्पशीलता, चंद्रमा के सतह और उप-सतह की बनावट, वहां मौजूद तत्वों, चंद्रमा के पूर्ण परिवेश (प्लाज्मा वातावरण), चंद्रमा के आयनमंडल आदि विषयों पर चर्चा हुर्ई। दूसरे चंद्र मिशन के दौरान भारतीय यान के चंद्रमा की सतह पर उतरने से पहले और उतरने के बाद वैज्ञानिक शोध की रूपरेखा क्या होनी चाहिए आदि पर भी बात हुई। चंद्रयान-2 से भारत क्या हासिल करेगा या क्या हासिल करना चाहिए, इस पहलू पर भी गौर किया गया। बैठक के आखिर में यह भी तय किया गया कि अगली बैठक में किन-किन विषयों को अध्ययन के लिए शामिल किया जाएगा। चंद्र मिशन से जुड़े उन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया जिस ओर विशेष ध्यान देेने की जरूरत है या उन तकनीकों को जिन्हें अधिक विश्वसनीय और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। चंद्रमा के वैज्ञानिक अनुसंधान के अन्य पहलू क्या हो सकते हैं इसपर भी बात हुई।
इसरो ने कहा है कि बैठक में उन संस्थानों और कॉलेजों के वैज्ञानिकों या प्रौद्योगिकीविदों को आमंत्रित किया गया जो चंद्र्र विज्ञान से या चंद्रमा के अध्ययन से जुड़े हुए हैं। बैठक के आखिर में इसरो अध्यक्ष के साथ एक संक्षिप्त परस्पर चर्चा आयोजित की गई जिसमें शिवन नेे चंद्रयान-2 मिशन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भविष्य में ग्रहों पर अन्वेषण मिशन भेजे जाने पर बल देते हुए मिशन से जुड़ी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। इसरो अध्यक्ष ने कहा कि ग्रह विज्ञान को और लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि इसरो ने अगले वर्ष की पहली तिमाही में चंद्रयान-2 लांच करने की योजना बनाई है। इसरो की तैयारियां 3 जनवरी को मिशन लांच करने को ध्यान में रखकर चल रही हैं।
Published on:
28 Sept 2018 07:14 pm
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