27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

महर्षि ने पूरी की बेंगलूरु से मुंबई तक साइकिल यात्रा

धमकी और यौन उत्पीडऩ का विरोध

2 min read
Google source verification
cyclist

महर्षि ने पूरी की बेंगलूरु से मुंबई तक साइकिल यात्रा

बेंगलूरु. जहां 15 वर्ष की उम्र में बच्चे अपने शैक्षणिक भविष्य उज्जवल बनाने की योजना बना रहे होते हैं वहीं महर्षि संकेत ने किसी भी रूप में उत्पीडऩ का सामना करने वाले बच्चों के लिए बेहतर भारत के बारे में सोचते हुए बेंगलूरु से मुंबई तक साइकिल यात्रा पूरी की। महर्षि ने शुक्रवार को बताया कि किसी के धमकाने का अपने साथी दोस्तों पर जब प्रभाव देखा तो उनकी मदद के लिए लोगों से बात करने की उसे आवश्यकता महसूस हुई। तब उसे धमकाने और यौन उत्पीडऩ के खिलाफ एक अभियान 'स्पीक आउटÓ शुरू करने का मौका मिला।

उसने गत 21 मई को बेंगलूरु से साइकिल यात्रा शुरू की जो धमकाने और यौन उत्पीडऩ के खिलाफ लोगों में जागरूकता फैलाने के साथ 1 जून को मुंबई में समाप्त हुई। यात्रा के दौरान मुद्दों पर चर्चा के लिए सुकांत पनग्राही, शान रे, एमजी दोददमानी, शोमी बनर्जी, क्रिस अविनाश और अंकिता कुंडू व कुछ कलाकारों ने उसका साथ दिया।

उन्होंने बताया कि चर्चा में लोगों ने अपनी जिंदगी की छिपी कहानियों को साझा किया, जिनके बारे में कभी सोचा भी नहीं था। तब उन्हें अहसास कराया कि वे अकेले पीडि़त नहीं है। महर्षि ने बताया कि मुंबई के रास्ते में गैर सरकारी संगठनों युवा, मुस्कान, मासूम, एसएमआरपीसी, यरवडा, सतारा के साथ भी 'स्पीक आउटÓ के बारे में चर्चा की। उनकी यात्रा धमकाने और यौन उत्पीडऩ पर चर्चा शुरू कर लोगों का ध्यान लाने का प्रयास था।
उन्होंने बताया कि अध्ययनों से पता चला कि ऐसे आघात से पीडि़त बच्चे चुप हो जाते हैं लेकिन बार-बार चित्रों या कुछ पैटर्न को चित्रित कर अपराध व्यक्त करने का प्रयास करते हैं।

उसने व टीम ने बच्चों और व्यस्कों को बताया कि इस तरह के उत्पीडऩ के परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं। पूरी यात्रा में उनकी मां ने पूरा समर्थन कर बड़ी भूमिका निभाई। महर्षि ने बताया कि उन्होंने साइक्लिंग और कला को अपने संदेश को फैलाने के लिए एक माध्यम के रूप में चुना। रंग और पैटर्न असीमित शब्दों को बोलते और अनुभवों को व्यक्त करते हैं।