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धर्म साधना का मुख्य आधार है ब्रह्मचर्य

वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, फे्रजर रोड के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन में उप प्रवर्तिनी निधि ज्योति ने कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र के सोलहवां अध्ययन में प्रस्तुत अध्ययन का नाम ब्रह्मचर्य समाधि स्थान है।

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धर्म साधना का मुख्य आधार है ब्रह्मचर्य

धर्म साधना का मुख्य आधार है ब्रह्मचर्य

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, फे्रजर रोड के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन में उप प्रवर्तिनी निधि ज्योति ने कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र के सोलहवां अध्ययन में प्रस्तुत अध्ययन का नाम ब्रह्मचर्य समाधि स्थान है। इस अध्ययन में ब्रह्मचर्य समाधि के दस स्थानों का विवेचन किया गया है। ब्रह्मचर्य धर्म साधना का मुख्य आधार है।


ब्रह्चर्य का सर्वसाधारण में प्रचलित अर्थ मैथुन सेवन का त्याग है किंतु जैन परम्परा में ब्रह्मचर्य का अर्थ बहुत ही गहन बताया गया है। ब्रह्म का अर्थ आत्मा है। जो अपने आत्मा स्वरूप में रमण करे तथा पौदगलिक सभी सुखों को हेय समझ कर त्याग देता है, वास्तव में वही ब्रह्मचारी है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य का पालन इंद्रिय संयम एवं मन संयम के बिना नहीं हो सकता। ब्रह्मचर्य की सुरक्षा के लिए भगवान ने नियमों का निरूपम भी किया है। जिन्हें अन्य साधनों व ग्रंथों में दस गुप्तियां व दस कारण बताए गए हैं। संचालन उत्तमचंद चुत्तर ने किया।


जन्म कल्याणक दिवस ३१ दिसंबर को
बेंगलूरु. आचार्य मुक्तिसागर सूरी के मार्गदर्शन में विश्व शांति के लिए २३वें तीर्थंकर पाश्र्वनाथ प्रभु के जन्म कल्याणक दिवस ३१ दिसंबर को २३ लाख महाभिषेक किया जाएगा। साथ ही, १ जनवरी को पाश्र्व प्रभु के १००८ अ_म भी करवाए जाएंगे। कल्याणक महोत्सव समिति के मीडिया प्रभारी देवकुमार के जैन ने बताया कि आयोजन में दक्षिण प्रांत से लाल वस्त्रों में सजकर १००८ जोड़े पाश्र्व प्रभु की प्रतिमाओं पर महाभिषेक करेंगे।

अनुराग का अर्थ है आकर्षण
बेंगलूरु. विमलनाथ जैन मंदिर में साध्वी प्रियरंजना ने प्रवचन में कहा कि माध्यस्थ गुण को आत्मासात करने के बाद जब गुणों की लाभकारिता और दोषों की भयंकरता स्पष्ट रूप से समझ आ जाए तब गुणानुराग नाम का गुण आत्मा में दृढ़ रूप से स्थिर हो जाता है। अनुराग का अर्थ है आकर्षण। हमें किसका आकर्षण ज्यादा है। जो सबसे ज्यादा ताकतवर हो और कठिन परिस्थिति में अपने को आश्वासन दे, मुसीबत में अपने को सलामत रखे- उस वस्तु के प्रति आकर्षण सहज रहता है। ऐसी कौन सी वस्तु है। सम्पत्ति, धन, कंचन- इनको प्राप्त करने के लिए भूख, प्यास, सर्दी, गर्मी सभी सहन कर लेते हैं। क्या ये सब अंतिम श्वास तक आपके पास रहेगी या आपके साथ रहेगी- कोई गारंटी नहीं? साध्वी ने कहा कि धर्म के क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आत्मा को जिस दिन गुणों में सलामती का ख्याल आ जाएगा उसी दिन गुणों का आकर्षण और गुणों का संग्रह करने की वृत्ति, गुणों का प्रतिपक्षी दोषों की तरह तिरस्कार भाव सहज रूप से पैदा हो जाएंगे।


चौदह पूर्व का सार है नवकार
चित्रदुर्गा. राजेन्द्र गुरु भवन में मुनि संयमप्रभ सागर ने नमस्कार महामन्त्र के कुंभ के बारे में बोलते हुए कहा कि नवकार तो चौदह पूर्व का सार है। यह मंत्र नहीं, महामन्त्र है। मुनि तपप्रभ विजय ने कुम्भ के साथ दीपचन्द भेरूलाल बोकडिय़ा के घर प्रवेश कर कुम्भ की मन्त्रोच्चार सहित स्थापना की। पूजन आदि कर नमस्कार मन्त्र की महिमा बताई। विकास एवं प्रीति बोकडिय़ा के हाथों कुम्भ की स्थापना करवाई।