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संबंध बनाए रखना बड़ी बात है

व्यक्ति से परिचय या संबंध का प्रारंभ चेहरे से होता होगा, लेकिन

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jaini

संबंध बनाए रखना बड़ी बात है

बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ में आचार्य महेन्द्र सागर ने कहा कि संबंध बनना बड़ी बात नहीं है। संबंध बढ़ाना भी बड़ी बात नहीं है। किंतु संबंध बनाए रखना बड़ी बात है।

किसी से संबंध हो जाना या बना लेना यह उपलब्धि है। व्यक्ति से परिचय या संबंध का प्रारंभ चेहरे से होता होगा, लेकिन उसकी पहचान परिचय से होने के बावजूद भी हृदय से जुड़ जाए तो स्थाई संबंध के रूप में हो जाती है।

संबंध वह निस्वार्थ होता है जो किसी भी हालत में बिखरता और टूटता नहीं। जो बिखर जाए और टूट जाए वह स्वार्थपूर्ण संबंध रहा होगा या अंतर तक छुआ नहीं होगा।

जो संबंध हार्दिक हो जाता है वही शुद्ध है। बाकी को स्वार्थ का ओर दिमागी रहा होगा। इंसान बड़ी ही विचित्र किस्म का है और खुदगर्ज भी है।

सामने वाला उसके अनुकूल होकर रहे तब तक बुराई नहीं करता, नहीं देखता किंतु थोड़ा प्रतिकूल हो चला तो फिर अच्छाई नहीं देख सकता।

सच्चे संबंध गलतियां या अवगुण नहीं देखा करते, क्योंकि गलतियां हमारी हो या उनकी संबंध को हमारा है।