
स्वयं को सोने का सिक्का बनाएं-साध्वी शीतलगुणाश्री
बेंगलूरु. त्यागराजनगर में विराजित साध्वी भव्यगुणाश्री व साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि सुख, दु:ख, मान अपमान, डर, पीड़ा, जन्म, मृत्यु, आकांक्षाएं, इच्छाएं, लालसाएं, क्रोध, मोह, लालच,अहम आदी सब कुछ शरीर से जुड़े हैं। जब तक मनुष्य स्वयं को शरीर समझता है तब तक वह इन सब का अनुभव करता रहता है। किंतु जब मनुष्य आत्मा के रूप को जान और पहचान लेता है तब वह इन सब भावनाओं से ऊपर उठ जाता है। तब ना उसको सुख का अनुभव होता है और ना दु:ख का, ना मान,ना अपमान, ना दर्द, ना पीड़ा, ना कोई डर। वह इन चक्र से बाहर आ जाता है। साध्वी ने कहा कि हमारी जिंदगी भले ही स्कूटर की तरह चले, लेकिन हमारा नाम इत्र की तरह सर्वत्र बिखरे यही कोशिश रहनी चाहिए। उन लोगों से दूर चलो जो हमें नीचा दिखाते हैं। उन झगड़ों से दूर रहें जो कभी हल नहीं होंगे। उन लोगों को खुश करने की कोशिश करने से दूर रहना है जो कभी हमारी कीमत नहीं देखते। जितना अधिक हम अपनी हीन भावना देने वाली चीजों से दूर रहेंगे, हम उतने ही स्वस्थ रहेंगे। साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि एक निवाला पेट तक पहुंचाने का भगवान ने क्या खूब इंतजाम किया है। अगर भोजन गर्म है, तो हाथ बता देते हैं, सख्त है तो दांत बता देते हैं, कड़वा या तीखा है,तो जुबान बता देती है। बासी है तो नाक बता देती है। बस मेहनत का है, या बेईमानी का, इसका फैसला आपको करना है। स्वयं को सोने का सिक्का बनाएं,जो कीचड़ में गिरकर अपनी कीमत को कम नहीं होने देता। खान-पान शुद्ध और सात्विक रखें। रहन-सहन पवित्र रखिए, इससे आपका चरित्र शुद्ध रहेगा और विचार निर्मल रखिए, इससे आपके संस्कार अच्छे रहेंगे। किसी की निंदा मत कीजिए। केवल इस पुण्य के कारण मरने के बाद आप शुभ गति प्राप्त कर सकेंगे। चित्र को नहीं बल्कि चरित्र को सुन्दर बनाने की कोशिश कीजिए। चरित्र को सुंदर बनाने के लिए मनुष्य का अच्छा होना जरूरी है। निकेश भंडारी ने बताया कि विहार सेवा में नरेंदकुमार भंडारी, किशोर बाफना, रजत कुमार बाफना, गौतमचंद डांगी, रोशनकुमार बाफना, र्षवर्धन बाफना, निकेश भंडारी ने लाभ लिया। पारस भंसाली ने बताया कि साध्वी शुक्रवार तक त्यागराज नगर विराजेंगी।
Published on:
26 May 2022 07:43 am
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
