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परोपकार की भाषा नहीं समझता मनुष्य

श्रुत मुनि ने कहा कि जिनेश्वर की ओर ले जाने वाली जिनवाणी ही आत्मा के लिए आगम ही एक आईना है।

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परोपकार की भाषा नहीं समझता मनुष्य

मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर सीआईटीबी परिसर में अक्षर मुनि ने कहा कि साधु, संतों के मुख से निकला एक एक वचन मुनष्य को तारता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य वृक्ष को पत्थर मारता है फिर भी वृक्ष फल ही देता है।

वृक्ष एक इन्द्रिय होते हुए भी परोपकार देता है और मनुष्य पंचेन्द्रिय होते हुए भी परोपकार की भाषा नहीं समझता है। मुनि ने पानी और वाणी के उपयोग और उसकी महत्ता को विस्तार से समझाया।

श्रुत मुनि ने कहा कि जिनेश्वर की ओर ले जाने वाली जिनवाणी ही आत्मा के लिए आगम ही एक आईना है। काया, माया और छाया यह छूटने वाली है यह साथ में आने वाली नहीं है पुण्य, प्रेम और प्रभु ही साथ देने वाले हैं।

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अंतर चेतना से जुड़ा रिश्ता सिद्धि तक चलता
मैसूरु. सिटी स्थानक में डॉ. समकित मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र के चौदहवें अध्ययन में कहा कि जो श्रेष्ठ होते हैं, वही कंकर के बदले में रत्न देते हैं। महापुरुष ही कोयले के बदले में डायमंड देते हैं।

उन्होंने कहा कि जो रिश्ता अंतर चेतना के साथ जुड़ा होता है वह रिश्ता सिद्धि तक साथ चलता है। जो रिश्ता धन और तन के साथ जुड़ा होता है, उस रिश्ते की नियति वही होती है, जो तन धन की होती है। तन जलने के साथ तन से जुड़ा रिश्ता भी जल जाता है। भक्ति का रिश्ता समय बीतने के साथ साथ और मजबूत होता चला जाता है।

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बच्चों ने लिया प्रशिक्षण
मैसूरु. तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में 'आओ चलो गांव की ओरÓ के अतंर्गत स्वास्थ्य एवं उन्नत जीवन शैली, स्वावलंबन, साक्षरता प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। महिला मंडल की बहनों ने स्वच्छ भारत गीत का संगान किया।

प्रेमा गुगलिया ने उन्नत जीवन शैली, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन एवं साक्षरता पर बच्चों को सिलाई, मेहंदी, गिफ्ट रेपिंग का प्रशिक्षण दिया। अध्यक्ष वनमाला नाहर, मंत्री खामोश मेहर, वंदना दलाल, सीमा पितलिया, मैना बडोला, सुधा नौलखा, मीनाक्षी नौलखा, निर्मल मेहर आदि सदस्याएं उपस्थित रहीं। कार्यशाला में करीब 40 बच्चों ने हिस्सा लिया।