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अधिकांश पाबंदियों से छुटकारा चाहता है कर्नाटक

खत्म हो रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन की व्यवस्था, कंटेनमेंट जोन की पहचान कर पाबंदियां 50 से 100 मीटर के दायरे में ही रहे, पीएम नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में सीएम येडियूरप्पा स्पष्ट किया राज्य का रुख

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अधिकांश पाबंदियों से छुटकारा चाहता है कर्नाटक

अधिकांश पाबंदियों से छुटकारा चाहता है कर्नाटक

बेंगलूरु.
कठिन आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही राज्य सरकार अब लॉकडाउन को सूक्ष्म तरीके से प्रबंधित करते हुए अधिकांश पाबंदियों से आजादी चाहती है ताकि राजस्व के स्रोत पूरी तरह खुल जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए पाबंदियों को वहीं तक सीमित करने की सलाह दी जहां कोविड-19 के मरीज हैं।


मुख्यमंत्री ने रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन से मुक्ति की वकालत की और लॉकडाउन को केवल कंटेनमेंट जोन तक सीमित रखने पर जोर दिया। कंटेनमेंट जोन को छोड़ बाकी सभी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन के सामान्य परिचालन की मांग की। उन्होंने कहा कि 'केवल कंटेनमेंट जोन को चिन्हित किया जाना चाहिए और 50 से 100 मीटर का क्षेत्र घेरकर और वहां कड़ाई बरती जाए।Ó इससे पहले भी राज्य ने बेंगलूरु शहरी और बेंगलूरु ग्रामीण जिले को रेड जोन घोषित किए जाने का विरोध किया था और महामारी नियंत्रित करने के लिए शहर को सूक्ष्म जोनों में बांटने की बात कही थी। राज्य सरकार ने केवल गंभीर कोरोना मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती कराने की बात कही और टेली-मेडिसिन को इस महामारी से लडऩे के लिए एक नए प्रोटोकॉल के तौर पर अपनाने पर जोर दिया।


राज्य ने मॉल, थिएटर आदि बंद रखने का सुझाव दिया लेकिन जो स्टैंड अलोन प्रतिष्ठान हैं उन्हें खोलने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रा को अनुमति दी जानी चाहिए। कम-से-कम मई अंत तक यात्राएं सामान्य बनाई जाए। अंतराष्ट्रीय यात्रियों को 14 दिनों के अनिवार्य क्वारंटाइन में रखा जाए जबकि अंतरराज्यीय यात्रियों को संस्थागत तरीके से क्वारंटाइन किया जाए। सभी अंतरराज्यीय यात्रियों को आवश्यक रूप से स्वास्थ्य सर्टिफिकेट जारी किया जाए जहां से वे अपनी यात्रा की शुरुआत करते हैं। उन्हें स्वास्थ्य सर्टिफिकेट स्थानीय अस्पताल या अधिकृत संस्थाएं जारी कर सकती हैं। अगर कोई बिना स्वास्थ्य सर्टिफिकेट के यात्रा करता है तो उसे अनिवार्य रूप से क्वारंटाइन में रखा जाए।


राज्य ने यह भी सुझाव दिया कि जांच को लेकर एक दिशा-निर्देश भी जारी होना चाहिए कि प्रत्येक राज्य को प्रति दस लाख लोगों में कितने की जांच कराना आवश्यक है। जांच उन्हीं की हो जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत हो। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की उपलब्धियों और कोरोना से लड़ाई में मिली सफलता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जांच क्षमता बढ़ाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया। फरवरी में केवल दो जांच प्रयोगशालाएं थी और राज्य की जांच क्षमता केवल 300 थी। आज राज्य में जांच प्रयोगशालाएं 30 और जांच क्षमता 6 हजार प्रति दिन से अधिक हो चुकी है। हाल ही में राज्य ने एक लाख लोगों की कोविड-19 जांच का लक्ष्य पार किया। राज्य में मई अंत तक जांच प्रयोगशालाएं 60 हो जाएंगी और यह कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'ट्रेसिंग, ट्रैकिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट का मूल मंत्र अपनाकर हमने कोविड-19 को अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर ढंग से नियंत्रित कया है।