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गुरु के चरणों में मिलती है मां की ममता

साध्वी समीक्षाश्री ने गुरुभक्ति के गुणानुवाद गीतिका के माध्यम से रखे। इस अवसर पर 80 एकासना हुए
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गुरु के चरणों में मिलती है मां की ममता

केजीएफ. मुनि सुव्रत के सान्निध्य में मरुधर केसरी मिश्रीलाल की जयंती मनाई गई। मुनि ने मरुधर केसरी मिश्रीमल के जीवन व संयम के आदर्शों पर प्रकाश डाला और सुंदर गीतिका के माध्यम से भाव व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु के चरणों में मां की ममता व पिता का वात्सल्य मिलता है। साध्वी समीक्षाश्री ने गुरुभक्ति के गुणानुवाद गीतिका के माध्यम से रखे। इस अवसर पर 80 एकासना हुए। अध्यक्ष प्रकाशचंद रातडिय़ा ने स्वागत किया। संचालन महेंद्र कुमार मुणोत ने किया।


माता-पिता को पीड़ा न दें
जिनकुशल सूरी जैन आराधना भवन, बसवनगुड़ी में साध्वी प्रियरंजनाश्री ने कहा कि हमारे भाव हमारे ही सुख दुख का निमित्त नहीं बनते, बल्कि हमारे आसपास के वातावरण, पड़ोसियों और परिवार पर भी पड़ता है। सकारात्मक सोच की तरह हमारी अथवा दूसरों की नकारात्मक सोच भी हमारे पर प्रभाव डालती है। इसलिए शास्त्रकार कहते हैं कि कभी भी जीवन में दुखी जनों की, माता-पिता की, गुरुजनों की बद्दुआ या दुराशीष नहीं लेनी चाहिए। उनके मन को पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए। उनकी नकारात्मक सोच हमारे को नुकसान पहुंचा सकती है।


दूसरों को पीड़ा पहुंचाना पाप
बेंगलूरु. विजयनगर में साध्वी मणिप्रभा ने कहा कि परोपकार करना जीवों का मौलिक एवं सहज धर्म है। आत्म साधना करने वाले साधक के लिए परोपकार के पीयूष का पान करना नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परोपकार के सोपान पर चढ़कर ही मुक्ति महल की मंजिल को पाया जा सकता है। महर्षि व्यास कहते हैं कि अठारह पुराणों में दो ही बात मुख्य है-दूसरों का उपकार करना पुण्य है और दूसरों को पीड़ा पहुंचाना
पाप है। अगर मनुष्य बहुत सारे शास्त्रों और पुराणों को न भी घोटे, सिर्फ इन दो बातों को ही हृदयंगम कर ले तो काफी है। साध्वी ऋजुता ने कहा कि अंतरिक्ष में जितने भी ग्रह होते हैं, उन ग्रहों के कारण मनुष्य का स्वभाव भी वैसा ही बन जाता है। शनिवार को मरुधर केसरी मिश्रीमल एवं संत रूप मुनि की जयंती मनाई जाएगी। दोपहर 2 से सायं 4 बजे राखी कार्यक्रम होगा।