
प्रेरक वचन : धर्म की आराधना में करें उत्तरोत्तर वृद्धि
बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में महावीर धर्मशाला में नए वर्ष के अवसर पर श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए जयधुरंधर मुनि ने कहा कि वीर निर्वाण संवत की अपेक्षा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को नव वर्ष की शुरुआत होती है।
इस नए वर्ष को मंगलकारी बनाने के लिए साधक को धर्म की आराधना में उत्तरोत्तर वृद्धि करनी होगी। धर्म से ही वृद्धि, ऋद्धि, समृद्धि, सिद्धि की प्राप्ति हो सकती है।
हर व्यक्ति शालिभद्र जैसी ऋद्धि, गौतम स्वामी जैसी लब्धि, अभयकुमार जैसी बुद्धि चाहता है, पर उसके लिए उसे उन महापुरुषों की तरह ही जीवन जीना होगा। एक नए उमंग, जोश, उत्साह के साथ एक नए जीवन की शुरुआत करनी होगी।
इससे पूर्व पुच्छिसुणं सूत्र, उत्तराध्ययन सूत्र का 36वां अध्ययन, महावीरापरक स्तसेत्र, जय जाप एवं गौतम रास का सामूहिक वांचन किया गया।
सभा में संतोष बोहरा, चन्द्र मेहता ने अठाई की तपस्या का प्रत्याख्यान ग्रहण किया। दीपावली की संश्या में 50 श्रावक-श्राविकाओं ने पौषध किया।
Published on:
9 Nov 2018, 6:09 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.