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ऐतिहासिक मैसूरु दशहरा उत्सव आरंभ

दशहरा उत्सव देवी चामुंडेश्वरी को समर्पित है, जो मैसूरु शहर और मैसूरु के शाही परिवार की प्रमुख देवता हैं। यह आयोजन राक्षस राजा महिषासुर पर देवी चामुंडेश्वरी की जीत का जश्न मनाता है। महिषासुर को पराजित करने के बाद देवी ने एक पहाड़ी को अपना निवास स्थान बनाया, जिसे चामुंडी पहाड़ी के नाम से जाना जाता है।

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मैसूरु. ऐतिहासिक मैसूरु दशहरा उत्सव रविवार को आरंभ हो गया। प्रसिद्ध संगीतकार हंसलेखा ने इसका औपचारिक उद्धघाटन किया। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार व मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगियों के अलावा, सांसद प्रताप सिम्हा और अन्य विधायक उद्धघाटन समारोह के दौरान मौजूद रहे। हंसलेखा ने कहा कि मैसूर राजवंश के पूर्व राजा नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार के शासनकाल के दौरान उन्‍होंने क्षेत्र के विकास के लिए बहुत कुछ किया।

दस दिवसीय समारोह के भव्य उद्घाटन से पहले, सिद्धरामय्या ने मंत्रियों के साथ यहां देवी चामुंडेश्वरी की विशेष पूजा की। इस मौके पर सिद्धरामय्या ने कहा कि राज्‍य सरकार इस साल राज्य में सूखे की वजह से सादे तरीके से लेकिन परंपरा को ध्यान रखते हुए दशहरा उत्सव का आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा, हमने देवी चामुंडेश्वरी से प्रार्थना की है कि कम से कम मानसून के दौरान यहां अच्छी बारिश हो।

मैसूरु दशहरे के महत्व का उल्लेख करते हुए सिद्धरामय्या ने कहा कि दुनिया भर के लोग यहां इस उत्सव को देखने आते हैं। मैसूरु दशहरा को नाड हब्बा (राज्य उत्सव) के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस उत्सव के माध्यम से कर्नाटक अपने लोगों को परंपरा, संस्कृति, और राज्य द्वारा हासिल किए गए विकास से अवगत कराता है।

कार्यक्रम में जिला प्रभारी एवं समाज कल्याण मंत्री डॉ. एचसी महादेवप्पा, पशुपालन मंत्री वेंकटेश के साथ ही विधायक जीटी देवेगौड़ा, दर्शन ध्रुवनारायण, हरीश गौड़ा आदि भी उपस्थित थे।

दस दिन में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम

दशहरा उत्सव देवी चामुंडेश्वरी को समर्पित है, जो मैसूरु शहर और मैसूरु के शाही परिवार की प्रमुख देवता हैं। यह आयोजन राक्षस राजा महिषासुर पर देवी चामुंडेश्वरी की जीत का जश्न मनाता है। महिषासुर को पराजित करने के बाद देवी ने एक पहाड़ी को अपना निवास स्थान बनाया, जिसे चामुंडी पहाड़ी के नाम से जाना जाता है। अगले 10 दिनों के दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। शहर में कुश्ती प्रतियोगिता भी होगी, जिसमें देश भर से पहलवान हिस्सा लेंगे। लोग विजयादशमी या पूर्णिमा पखवाड़े के 10वें दिन मैसूर दशहरा के भव्य समापन का बेसब्री से इंतजार करते हैं जब जंबू सावरी निकाली जाती है। 24 अक्टूबर को होने वाली जंबू सावरी के बाद विभिन्न झांकियां और सांस्कृतिक दल निकलेंगे।