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मैसूरु दशहरा: स्वर्ण हौदे में सवार होकर निकलीं चामुंडेश्वरी देवी

Mysore Dasara celebrations भव्य जूलस के साथ दशहरा महोत्सव का समापन मैसूरु दशहरा के इतिहास में जुड़ा एक और स्वर्णिम पृष्ठ

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मैसूरु. जम्बो सवारी जुलूस के साथ सोमवार को यहां दस दिन तक चले विश्व प्रसिध्द ऐतिहासिक दशहरा महोत्सव (Mysore Dasara celebrations) का समापन हो गया।

दोपहर के बाद निकाली गई गई जम्बो सवारी (Jamboo Savari) समापन समारोह में आकर्षण का मुख्य केन्द्र रही। हाथी अभिमन्यु की पीठ पर750 किलोग्राम वजन का स्वर्ण हौदा सजाया गया और हौदे में मां चामुंडेश्वरी विराजित हुईं और जुलूस चल पड़ा। कई दिनों से चल रही तैयारियों को अंजाम देने की घड़ी आ गई थी। महावतों से लेकर, घुड़सवारों तक सभी बेहद चौकन्ने, सतर्क थे।

नादस्वरम की स्वर लहरियां और ढोल-कुणिता की थाप

मां चामुंडेश्वरी के जुलूस के ठीक पीछे नादस्वरम की मधुर ध्वनि गूंज रही थी और ढोल-कुणिता की थाप पर लोक कलाकार नृत्य करते हुए जुलूस की शोभा बढ़ा रहे थे। हाथियों को इस बार पांच किलोमीटर की जगह, लगभग ५०० मीटर की ही दूरी तय करनी थी और यह दूरी हाथियों के काफिले ने यूं पूरी की जैसे यह उनके लिए रोज का काम हो। जुलूस पूरा होते ही मैसूरु के इतिहास में एक और स्वर्णिम पृष्ठ जुड़ गया।

गूंजे वैदिक मंत्र, प्रतिमा पर चढ़े फूल

इसके पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महल के बलराम गेट के पास मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने चामुंडेश्वरी देवी की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर नंदी ध्वज कार्यक्रम पूरा किया। इस समय मैसूरु शाही परिवार के लोग भी उनके साथ थे।

राज्य की समृद्ध कला व संस्कृति की छटा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मैसूरु दशहरा ऐतिहासिक होने के साथ ही राज्य की समृद्ध कला व संस्कृति की छटा भी पेश करता है। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण इस बार बेहद सादगी से यह आयोजन किया गया लेकिन मैं मां चामुंडेश्वरी से प्रार्थना करता हूं कि वे राज्य को समृध्दि व शक्ति दें ताकि अगले साल यह आयोजन विशाल पैमाने पर हो।

बता दें कि मैसूर के शासक वाडियार राजा देवी दुर्गा के उपासक थे और उन्होंने नगर के बाहर एक पहाड़ी पर चामुंडेश्वरी देवी का मंदिर बनवाया था। चार सौ से अधिक वर्षों से चामुंडी पहाडिय़ों के किनारे बसा यह शहर अति भव्यता के साथ विराट पैमाने पर दशहरा महोत्सव के आयोजन का गवाह बनता रहा है।

कोरोना की अदृष्य छाया

हालांकि, समूचे समारोह में कोरोना की अदृष्य छाया दिखाई देती रही। अतीत में जहां हजारों लोग इस अद्भुत नजारे को जीभर के देखते थे वहीं इस बार कुछ सौ लोग ही राज्य के इस सबसे बड़े लोकोत्सव को नजदीक से देख पाए। हालांकि टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर लाखों लोग इसकी भव्यता के गवाह बने।

कोरोना के कारण 410 वां मैसूरु दशहरा महोत्सव सादगी के अलावा संक्षिप्त भी रखा गया। कई कार्यक्रम रद्द कर दिए गए और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी बड़े पैमाने पर नहीं हो पाए।

कोरोना वॉरियर्स को समर्पित

राज्य के लोक उत्सव का दर्जा पा चुके दशहरा महोत्सव को इस वर्ष कोरोना से जंग में लोगों की हिफाजत कर रहे कोरोना वॉरियर्स को समर्पित किया गया। जम्बो सवारी के ठीक पीछे एक नर्स मुंह पर मास्क लगाए जुलूस में शामिल हुई और सामाजिक दूरी के साथ एहतियात बरतने का संदेश देती रही।