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150 साल पुरानी बैंड की धुन का जादू सुर लहरियों का सम्मोहन

महल की दरो-दीवार पर झिलमिलाती रोशनी, टिप टिप करती वर्षा बूंदों के बीच पुलिस बैंड की सुर लहरियों ने शहर की एक और शाम सुहानी बनाई

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POLICE BAND

मैसूरु. महल की दरो-दीवार पर झिलमिलाती रोशनी, टिप टिप करती वर्षा बूंदों के बीच पुलिस बैंड की सुर लहरियों ने शहर की एक और शाम सुहानी बनाई। दशहरा महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या के क्रम बीते दिवस ६५० से अधिक पुलिस कर्मियों ने वाद्ययंत्रों पर कर्णप्रिय धुनों को उतारा।

पुलिस बैंड की प्रस्तुति के प्रति सदियों से जारी आकर्षण ही था, जिसके चलते देश-विदेश के विभन्न हिस्सों से आए मेहमान निश्चित समय से पूर्व ही जुट गए। कलाकार हर बार की तरह श्रोताओं की उम्मीदों पर शतप्रतिशत खरा उतरे। एम वासुदेवाचार्य, मुथैया भागावतार, त्यागराजा, मुत्तुस्वामी दीक्षितर, श्यामाशास्त्री, स्वाति तिरुनाल, जयचामराजा वाडियार, पुरंदर दास, कनक दास, फैयाज खान, बरकत अली खान और रफी खान की कर्नाटक एवं हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की रचनाओं पर एक के बाद धुनें वातावरण में गूंजती रहीं और श्रोता संगीत के सागर में गोते लगाते रहे। इस दौरान डा. राजकुमार की फिल्मों सहित संदलवुड की लोकप्रिय फिल्मों के गानों पर प्रस्तुतियों ने खूब वाहवाही बटोरी।

पूर्व मैसूरु शाही परिवार के उत्तराधिकारी यदुवीर और उनकी पत्नी भी उन मेहमानों में शामिल थे जिन्होंने सोमवार बारिश के बीच बैंड की प्रस्तुति का आनंद लिया। अन्य अतिथियों में गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी, जिला प्रभारी मंत्री एच सी महादेवप्पा, पुलिस महानिदेशक आर के दत्ता भी शामिल थे। बैंड ने त्रिशिका की अपील पर हिंदी फिल्म के गानेा परदेसी....परदेसी की धुन भी बजाई।


स्थापना के साथ ही बना मनमोहक
वाडियार राजशाही ने इस क्षेत्र में संगीत, शिक्षा और तमाम कलाओं को संरक्षित, संवर्धित करने में अहम भूमिका अदा की है। शाही परिवार के कई सदस्य स्वयं कर्नाटक व पश्चिमी संगीत में निपुणता रखते रहे हैं। तत्कालीन महाराजा चामराजा वाडियार ने यूरोपीय पद्धति के अनुरूप एक पलटन संगीत प्रस्तुति के लिए पृथक बनाने की जरूरत महसूस की और १८६८ में अपने दीवानों के साथ मंत्रणा उपरांत ‘महल बैंड’ की स्थापना की। यह बैंड शाही परिवार के विशेष उत्सवों के दौरान कला प्रदर्शन करता रहा, जिसमें प्रारंभिक दौर में १५० सदस्य थे।


फ्रांसीसी को मिला नेतृत्व
फ्रांस के संगीतविद जेटी डिफ्रिज ने बैंड का नेतृत्व किया और श्रेष्ठ संगीत विद्यालयों के कलाकारों से पैलेस आर्केस्ट्रा को सुसज्जित किया।


कुछ समय पश्चात इस टुकड़ी को दो भागों में बांटा गया, जिसमें एक पश्चिमी संगीत पर आधारिक इंग्लिश बैंड और एक कर्नाटक शास्त्रीय संगीत का प्रतीक कर्नाटक आर्केस्ट्रा बना। बैंड में शामिल कलाकारों की प्रतिभा को बेहतरीन बनाने के उद्देश्य से संगीत निदेशक और इस क्षेत्र के विद्वत जनों की नियुक्ति की गई।


इंग्लिश बैंड के नामचीन बैंड नायकों में जेटी डिफ्रिज, एम परेरा, जेएम पेरेइरा, जे फ्रांसिस जेविर, फेलिक्स एम जोसेफ और आरोग्यस्वामी हैं।


कर्नल बोगी, क्वीन्स कलर्स, व्हेयर दि कैफे लाइट्स आर ग्लीमिंग, माय रेजीमेंट, ग्लेडिएटर्स फेयरवेल, एम्पारिटो रोका, सोल ए सेविले, इन द पर्सियन मार्केट, होच हिडेक्सबर्ग!, मे ब्लास्म, द साउंड ऑफ म्यूजिक, सारे जहां से अच्छा, शेर ए जवान, दि वियना वाल्ट्ज, अल्ला फिगेरो, सील्ड विद ए किस, एल-बिम्बो, एवरी ब्रीथ यू टेक, बीथओवेन्स फिफ्थ और मोजार्ट की सिम्फनी नंबर ४० कुछ चुनिंदा संगीत कृतियां हैं, जिन्हें इंग्लिश बैंड ने बखूबी अपनी प्रस्तुतियों में शामिल किया है।

कड़ी है भर्ती प्रक्रिया
घुड़सवार पुलिस मुख्यालय के एक कोने में स्थित इंग्लिश बैंड इकाई को देखकर अमूमन ऐसा जान पड़ता है कि यह भी पुलिस को कोई सामान्य टुकड़ी है। लोग यह नहीं समझ पाते कि यह एक ऐसा बैंड है जो साल दर साल अपनी प्रस्तुतियों के बल पर विश्व भर के लोगों को आकर्षित करता है। इस बैंड का हिस्सा बनने की प्रक्रिया बेहद सख्त है। इनके अधिकांश सदस्य ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूजिक (लंदन) की परीक्षाओं में उत्तीर्ण होते हैं। पश्चिमी संगीत रचनाओं के लिहाज से यह बैंड एक शानदार विरासत है। वर्तमान समय में इसकी सदस्य संख्या ५० है। हालांकि नौ दिवसीय दशहरा महोत्सव के दरमियान यह संख्या ३५२ तक पहुंचती है।

सैन्य संगीत का प्रशिक्षण केंद्र
मैसूरु के इंग्लिश बैंड के बहुतेरे सदस्य तीन प्रकार के वाद्ययंत्रों में महारत रखते हैं। जब जैसी जरूरत हुई उसी भूमिका में होते हैं। यह प्रदेश में सैन्य संगीत के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। विभिन्न जिलों के उदीयमान पुलिस बैंड के सदस्य दक्षता हासिल करने के लिए यहीं प्रशिक्षण लेते हैं। बदलते समय के साथ बैंड ने आधुनिक पॉप और समाकालीन संगीत को भी अपनी प्रस्तुतियों में शामिल किया है।

दो भाग किए गए बैंड के
बीसवीं सदी के पचास के दशक में शाही बैंड में परिवर्तन किए गए। १९५८ में इस पलटन को घुड़सवार पुलिस कंपनी ऑफ कर्नाटक के कार्यालयाधीन किया गया। फिर दोनों बैंड के सदस्यों की संख्या में कमी करते हुए नामकरण किया गया, जिसके तहत पश्चिमी संगीत आधारिक टुकड़ी को कर्नाटक शासकीय बैंड और कर्नाटक संगीत विधा के दल को कर्नाटक शासकीय आर्केस्ट्रा के रूप में जाना गया। ये दोनों बैंड पुलिस विभाग के अधीन लाए गए।

कर्नाटक बैंड भी अतुलनीय
कर्नाटक पुलिस बैंड के नाम से पहचाना जाता कर्नाटक शासकीय आर्केस्ट्रा की स्थापना १९१८ में नालवाडी कृष्णराजा वाडियार के समय में हुई। भारतीय शास्त्रीय संगीत के मामले में इसका कोई शानी नहीं है। यह बैंड सारंगी, नवगोट, सितार, दिलरुबा, इस्सार, बालाकोकिला और सोराभाट जैस वाद्ययंत्रों से सुसज्जित है।

मिर्जा मार्ग पर बैंड हाउस बनाया गया था। इस इमारत में वर्तमान समय में मैसूरु शहर पुलिस आयुक्त का कार्यालय है। कर्नाटक बैंड को ‘कर्नाटक कलाश्री पुरस्कार’ से नवाजा जा चुका है। १९५१ में नई दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड में इस बैंड ने प्रस्तुति दी थी। बेंगलूरु में १९८६ में हुए सार्क सम्मेलन में भी जलवा बिखेरा था।