11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

धोखाधड़ी रोकथाम के लिए जागरुकता जरूरी

हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर पुलिस आयुक्त एमएन नागराज ने कहा कि आनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए जागरुकता बेहद जरूरी है।

2 min read
Google source verification
धोखाधड़ी रोकथाम के लिए जागरुकता जरूरी

धोखाधड़ी रोकथाम के लिए जागरुकता जरूरी

हुब्बल्ली. हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर पुलिस आयुक्त एमएन नागराज ने कहा कि आनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए जागरुकता बेहद जरूरी है। पुलिस आयुक्त नागराज, भारतीय स्टेट बैंक प्रादेशिक कार्यालय तथा हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर पुलिस आयुक्तालय की ओर से आयोजित एटीएम उपयोग जागरुकता कार्यक्रम का उद्घाटन कर बोल रहे थे।


उन्होंने कहा कि विदेश में बैठा एक व्यक्ति बैंक खाते को हैक कर रुपयों को अवैध तौर पर हस्तांतरण करता है। ऐसे मौके पर पुलिस भी मजबूर हो जाती है। इसके चलते ऐसे जालसाजों के जाल में ना फंसे, इसके लिए सावधानी बरतनी चाहिए। एटीएम कार्ड संख्या, पासवर्ड, एक कार्यकाल का पासवर्ड (ओटीपी) तथा बैंक खाते की जानकारी किसी से भी साझा नहीं करनी चाहिए। एटीएम या फिर बैंक खाते की कोई भी समस्या तथा संदेह होने पर सीधे तौर पर बैंक के प्रबंधक से मुलाकात कर बातचीत करनी चाहिए। आप लक्की विजेता हैं, एक करोड़ रुपए का इनाम लगा है, दस लाख रुपए जमा करके प्राप्त करें कह कर फोन तथा ई-मेल संदेश आते हैं, जिनकी अनदेखी करनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि ऐसे लोग बिना मेहनत के धोखाधड़ी के जरिए अर्जित किए जाने वाले धन को अपराधिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते हैं। इससे भी समाज पर बूरा असर पड़ता है। जालसाजों के बारे में सतर्क रहकर इनपर लगाम कसनी चाहिए।


भारतीय स्टेट बैंक प्रादेशिक कार्यालय के उप महाप्रबंधक इंद्रनील बांजा ने कहा कि बिना करेंसी की आर्थिकता से देश को बहुत फायदा है। नए नोटों की छपाई के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले वर्ष 7,500 करोड़ रुपए खर्च किया, हर वर्ष न्यूनतम 3,500 करोड़ रुपए इसके लिए खर्च किया जाता है। एक नोट का जीवन काल पांच से सात वर्ष मात्र है। करेंसी रहित आर्थि व्यवस्था होगी तो राशि को स्कूलों के विकास, बिजली कनेक्शन आदि ढ़ांचागत सुविधाओं के लिए खर्च कर सकते हैं। कार्यक्रम में बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक विजय कुमार चौरसिया, निरीक्षक प्रभु सूरिन आदि उपस्थित थे।

पुनर्वास में सहयोग करना चाहते हैं
मडिकेरी. कोडुगू जिले के बाढ़ प्रभावितों के लिए हर वर्ग के लोग सहयोग दे रहे हैं। इसी क्रम में एक आदिवासी दंपती ने प्रभावित लोगों को पुनर्वास के लिए अपनी जमीन का उपयोग करने का सुझाव देकर एक अनोखा सहयोग दिया है।
राहत एवं पुनर्वास कर्यों के लिए राज्य के लोग मुख्यमंत्री राहत कोष में नकदी और अन्य प्रकार का सहयोग दे रहे हैं, इस पुनीत कार्य में सहयोग करने की मंशा से पौंचा नामक एक आदिवासी ने कुछ अलग करने की ठानी और उन्होंने अपनी जमीन ही पुनर्वास कार्यों के लिए सौंप दी।


पौंचा ने जिला उपायुक्त के मोबाइल पर संदेश दिया कि उनके पास तीन एकड़ जमीन है, जिसमें वे दो एकड़ जमीन प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए दे रहे हैं।

पौंचा का यह सहयोग अपनी किस्म का विशेष सहयोग था जो तेजी से वायरल हुआ है और अब समाज के हर वर्ग की ओर से पौंचा की सराहना की जा रही है।


पौंचा ने जिला प्रशासन को ऑफर दिया है कि अगर उनकी जमीन पर पुनर्वास कार्यों के लिए मकान बनाना संभव नहीं है तो प्रशासन उस जमीन को बेच सकता है। उस राशि का उपयोग पुनर्वास कार्यों के लिए किया जाए। पौंचा ने कहा, मुझे कोई बच्चा नहीं है। मैं और मेरी पत्नी चाहते हैं कि इस विपदा की घड़ी में हमसे जो भी सहयोग बन पड़ेगा वह करेंगे।
उन्होंने कहा कि बारिश में सैंकड़ों लोगों की संपत्ति उजड़ गई है और अपनों को खोने का गम है। इसलिए मैं ऐसे लोगों को सहयोग देने के लिए अपनी दो एकड़ की जमीन दान कर रहा हूं।