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नीट : अब सता रहा सीट खोने का डर

अनुग्रह अंक का मामला: काउंसलिंग स्थगित होने से विद्यार्थी प्रभावित

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नीट : अब सता रहा सीट खोने का डर

बेंगलूरु. तमिल भाषा के प्रश्न पत्र में 49 प्रश्नों का अंग्रेजी से तमिल में गलत अनुवाद होने के कारण 24720 विद्यार्थियों को 196 तक अनुग्रह अंक (गे्रस माक्र्स) देने के मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ के निर्देश के बाद प्रभावित राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (एनइइटी) के दूसरे चरण के काउंसलिंग के कारण प्रदेश के करीब 65000 विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। इनमें से ज्यादातर विद्यार्थियों को मेडिकल व डेंटल की सीट खोने का डर सता रहा है।

हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के इस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। दो सप्ताह बाद फिर से सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को बीच का रास्ता निकालने का सुझाव दिया है। एनइइटी का आयोजन करने वाले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसइ) ने ग्रेस माक्र्स देने के चेन्नई उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रिम कोर्ट में चुनौती दी थी।

बढ़ी समय सीमा
प्रदेश में काउंसलिंग का जिम्मा संभाले कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केइए) ने दूसरे चरण की काउंसलिंग की समय सीमा अगले आदेश तक बढ़ा दी है।
सीबीएसइ ने ग्रेस माक्र्स या दूसरे चरण की काउंसलिंग को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, जिसको लेकर छात्र असमंजस में हैं।

एक अंक का अंतर यानी...
शिक्षाविदों का भी कहना है कि 24720 विद्यार्थियों को अगर 196 गे्रस माक्र्स मिलते हैं तो पूरा समीकरण बदल जाएगा। एक अंक के अंतर का मतलब योग्यता सूचि में करीब 2000 विद्यार्थियों से आगे या पीछे रह जाना। इन अंकों के कारण योग्यता सूची प्रभावित होगी क्योंकि अंक देने के बाद नए सिरे से योग्यता सूची जारी करनी होगी।

चार जून को जारी नतीजों में योग्य घोषित विद्यार्थियों के परिणामों पर असर पड़ेगा। पीछे रहे हजारों विद्यार्थी आगे निकल जाएंगे और आगे रहे हजारों विद्यार्थी पीछे छूट जाएंगे। जबकि घोषित नतीजों के आधार पर ही देश भर के एमबीबीएस व डेंटल स्नातक कोर्स में दाखिले के लिए काउंसलिंग चल रही है।