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मां-बाप को धोखा देने वाला कभी सुखी नहीं

मां बाप को धोखा देने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता है।

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मां-बाप को धोखा देने वाला कभी सुखी नहीं

मां-बाप को धोखा देने वाला कभी सुखी नहीं

मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में सिटी स्थानक में डॉ समकित मुनि ने सोमवार को महासती चेलना की कथा माला सुनाते हुए कहा कि चेलना अपने मां-बाप से नजर छिपाकर महाराजा श्रेणिक के साथ अवश्य भाग निकली, लेकिन कुछ दिनों तक पटरानी बनकर सुखमय जीवन यापन करने के बाद उसे राजा श्रेणिक की असलियत पता चला।


मुनि ने कहा कि शिकार, मांसभक्षण, शराब आदि व्यसनों से ग्रस्त राजा श्रेणिक को पाकर चेलना को अपने मां-बाप याद आने लगे। मुनि ने कहा कि जिस मां-बाप ने सुख से पाला-पोषा, बड़ा किया, पढ़ाया, लायक बनाया और उन्हीं को धोखा देकर भाग निकली। मां बाप को धोखा देने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता है।

मुनि ने कहा कि जिस प्रकार चूहा एक छोटा सा टुकड़ा के लालच में पिंजरे में फंसकर तड़पता है, उसी प्रकार मनुष्य भी थोड़ी से चाहत या लालच में अपनी प्रतिष्ठा, अपना कत्र्तव्य, अपनी कुल की मर्यादा, अपने परिवार का गौरव आदि सभी को भूलकर अचानक बिना सोचे समझे गलत निर्णय ले लेता है और फिर पछताता है।


प्रारंभ में पूछीसूणम संपूठ का वांचन करवाया गया। भवांत मुनि, जयवंत मुनि ने तपस्वियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। मंत्री सुशीलकुमार नंदावत ने स्वागत किया। मोहनलाल सुमतिलाल सेठिया एवं रविकुमार भरतकुमार पटवा परिवार ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

सांसारिक भौतिक सुख अभिमान करने जैसा नहीं
बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेतामबर मूर्तिपूजक संघ में आचार्य महेंद्र सागर सूरी ने प्रवचन में कहा कि पुण्ययोग से मिली कोई भी सांसारिक भौतिक सुख सामग्रियों का जरा भी अभिमान करने जैसा नहीं है।


उन्होंने कहा कि भौतिक नजरिए से हम कुछ भी नहीं है, क्योंकि जो कुछ भी दिख रहा है, जो कुछ पुण्ययोग से मिला है, वह सब ही क्षणिक है, दुखदायी है, पापकारी है फिर उनका अभिमान भला क्यों किया जाए।


उन्होंने कहा कि यहां किसी का कुछ रहा नहीं और रहेगा भी नहीं, मौत आने पर सब सफाया हो जाएगा। हमसे संग्रहित भोग हुआ या न भोगा हुआ सब कुछ ले जाएगी। नीतिकार कहते हैं कि वृद्धावस्था रुप को हर लेती है, वृद्ध होने पर रुप में कुरुपता आ जाती है।


उन्होंने कहा कि फिर उस रूप के कोई दीवाने नहीं बनेंगें और वृद्धत्व में देखने जैसा बचता भी क्या है। इंसान की आशा-आकांक्षा उसके धैर्य को हर लेती है।