
चिकित्सा जगत की नई उम्मीद: बिना सर्जरी लगा पेसमेकर
बेंगलूरु. कैंसर, कीमोथेरेपी, संक्रमण, डायलिसिस या अन्य किसी कारणों से हृदय के जिन मरीजों में पारंपरिक पेसमेकर लगाना संभव नहीं है उन मरीजों के लिए विशेषज्ञ लीडलेस पेसमेकर का सहारा ले रहे हैं। हालांकि बेहद कम धडक़न वाले हर मरीज में इस पेसमेकर का उपयोग किया जा सकता है कि नहीं, इस पर अब भी क्लिनिकल ट्रायल जारी है। विदेशों में करीब ४-५ वर्ष से इस पेसमेकर का इस्तेमाल होता आ रहा है, जबकि भारत में यह गत वर्ष ही चलन में आया। देश भर में इस पेसमेकर को लगाने वाले २०-२५ विशेषज्ञ ही हैं। इनमें से करीब चार विशेषज्ञ बेंगलूरु में हैं।
फोर्टिस अस्पताल के इंनटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजपाल सिंह ने सोमवार को बताया कि ट्रायल सफल रहा तो आने वाले पांच वर्षों में पारंपरिक पेसमेकर की तरह ही इस नए पेसमेकर को बेहद कम धडक़न के उपचार में इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर मरीज को यह पेसमेकर लगाया जा सकेगा।
हृदय में पेसमेकर लगाना और आसान हो जाएगा। क्योंकि ये नए पेसमेकर बिना किसी सर्जरी के लगाए जा सकते हैं। पेसमेकर का वजन और आकार भी काफी कम हुआ है। पारंपरिक पेसमेकर की तरह इस विशेष प्रकार के पेसमेकर में लीड और तारों की झंझट भी नहीं है। इसलिए इसे लीडलेस पेसमेकर कहा जाता है।
डॉ. सिंह ने बताया कि उन्होंने और उनकी टीम ने मोटापे और हृदय की बीमारी से जूझ रही ७४ वर्षीय महिला को यह पेसमेकर लगाने में सफलता हासिल की है। स्तन कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी से महिला के ऊपरी बांह की नस अवरोधित हो गई थी। जिसके कारण पारंपरिक पेसमेकर लगाना संभव नहीं था। लेकिन उसे बचाने के लिए पेसमेकर लगाना ही विकल्प था। जो दिल की धडक़न पर बारीक नजर रखता है। धडक़न के धीमे होने पर इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन थेरेपी का इस्तेमाल कर धडक़नें नियंत्रित करता है।
इंनटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शशिधर ने बताया कि पारंपरिक पेसमेकर को ऑपरेशन के जरिए मरीज के सीने में त्वचा के नीचे लगाया जाता है। लीडलेस पेसमेकर को फिमोरल आर्टरी के माध्यम से दिल के अंदर सीधे लगाया जाता है। इसे जरूरत न होने पर बिना सर्जरी के हटाया भी जा सकता है।
Published on:
04 Dec 2018 01:43 am
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