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सिजेरियन डिलीवरी पर अंकुश लगाने के लिए नया कार्यक्रम जल्द : स्वास्थ्य मंत्री

प्रदेश में सिजेरियन डिलीवरी की दर हर साल बढ़ रही है। सिजेरियन दर 2021-2022 में 35 फीसदी से बढ़कर 2022-23 में 38 फीसदी हो गई। फिलहाल राज्य में सिजेरियन डिलीवरी दर 46 फीसदी है। खासकर निजी अस्पतालों में 61 फीसदी सिजेरियन हो रहे हैं। निजी अस्पताल Private Hospitals अधिक सिजेरियन प्रसव करा रहे हैं क्योंकि यह लाभदायक और आसान है।

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बेंगलूरु.

स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडूराव ने कहा है कि राज्य Karnataka में सिजेरियन डिलीवरी cesarean delivery को नियंत्रित करने के लिए अगले महीने एक नया कार्यक्रम लागू किया जाएगा। मंत्री ने सोमवार को बेलगावी के सुवर्ण सौधा में विधान परिषद की कार्यवाही में विधान परिषद सदस्य जगदेव गुट्टेदार के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए यह बात कही।

सिजेरियन डिलीवरी दर 46 फीसदी

उन्होंने कहा, प्रदेश में सिजेरियन डिलीवरी की दर हर साल बढ़ रही है। सिजेरियन दर 2021-2022 में 35 फीसदी से बढ़कर 2022-23 में 38 फीसदी हो गई। फिलहाल राज्य में सिजेरियन डिलीवरी दर 46 फीसदी है। खासकर निजी अस्पतालों में 61 फीसदी सिजेरियन हो रहे हैं। निजी अस्पताल Private Hospitals अधिक सिजेरियन प्रसव करा रहे हैं क्योंकि यह लाभदायक और आसान है। मां और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए इस पर अंकुश लगाना जरूरी है। इस संबंध में, महिलाओं को प्राकृतिक प्रसव के लिए मानसिक रूप से सक्षम होने की आवश्यकता है। उन्होंने सदन को बताया कि वह इसके लिए एक नया कार्यक्रम लागू कर रहे हैं।

भ्रूण हत्या के विरुद्ध सफल डिकॉय ऑपरेशन, 46 लोग गिरफ्तार

स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को बताया कि 2023-24 से राज्य में भ्रूण हत्या feticide के संबंध में 8 मामले दर्ज किए गए हैं और 46 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। स्कैनिंग सेंटरों scanning centers और अस्पतालों पर बढ़ती जांच के कारण राज्य में बड़ी संख्या में भ्रूण हत्या के मामले सामने आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रूण हत्या करने वालों के खिलाफ डिकॉय ऑपरेशन कर कार्रवाई की जा रही है।

वर्ष 2018 से राज्य के सभी स्कैनिंग सेंटरों का पंजीकरण एवं नवीनीकरण अनिवार्य रूप से बालिका ऑनलाइन सॉफ्टवेयर Balika Online Software के माध्यम से किया जा रहा है।

लिंगानुपात के आंकड़ों पर निगरानी

शत-प्रतिशत गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया राज्य स्तर पर चल रही है और ग्रामीण स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से लिंगानुपात के आंकड़ों की निगरानी करने की योजना है।

136 मामले दायर

राज्य में अब तक पीसी एवं पीसीपीएनडीटी PC & PCPNDT (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक) अधिनियम का उल्लंघन करने वाले स्कैनिंग सेंटर, मालिकों और चिकित्सकों के खिलाफ अदालत में कुल 136 मामले दायर किए गए हैं। 74 मामलों में बरी कर दिया गया जबकि 65 मामले विभिन्न चरणों में अदालत में लंबित हैं।

इनाम राशि बढ़ी

उन्होंने कहा कि स्कैनिंग सेंटरों, अस्पतालों, चिकित्सकों/दलालों और गर्भवती महिलाओं के रिश्तेदारों के खिलाफ सूचना देने वाले और अदालत में मामला दर्ज कराने में मदद करने वाले मुखबिरों को कर्नाटक सरकार द्वारा दिया जाने वाला इनाम 50 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दिया गया है।

राज्य टास्क फोर्स का गठन

उन्होंने कहा कि पीसी एवं पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आयुक्त की अध्यक्षता में एक राज्य टास्क फोर्स का गठन किया गया है। बेंगलूरु ग्रामीण, बेलगावी, मंड्या और कोलार जिलों में राज्य स्तर पर गुप्त अभियान चलाए गए हैं।