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कंबाला का रोमांच बढ़ाएगी नई प्रणाली

समय की बचत के साथ ही आसान होंगे परिणाम

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बेंगलूरु. राज्य के तटीय इलाकों में बेहद लोकप्रिय पारंपरिक खेल कंबाला (भैंस दौड़) में कुशल समय प्रबंधन के लिए स्वचालित टाइम गेट और फोटो फिनिश परिणाम प्रणाली शुरू की जाएगी।

बताया जाता है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कंबाला का अधिकांश आयोजन 2-3 दिनों तक चलता है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में इस आयोजन में भाग लेने वाले भैंस जोड़ों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। कई बार भैंसों को दौड़ शुरू करने में समय लग जाता है और कभी-कभी यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि वास्तविक विजेता कौन है।मालूम हो कि एक दशक पहले, खेल की अवधि को कम करने के लिए खेल में लेजर फिनिशिंग प्रणाली शुरू की गई थी। अब समय को और कम करने के लिए जिला कंबाला समिति ने घोड़े की दौड़ में उपयोग किए जाने वाले स्टार्टिंग बैरियर की तर्ज पर स्वचालित टाइम गेट प्रणाली की शुरुआत की है। प्रत्येक रेसिंग ट्रैक में दो सस्पेंशन गेट होंगे जो झंडी दिखाने के बाद ऊपर की ओर खुलेंगे।

रोकेंगे समय की बर्बादी

मेंगलूरु जिला कंबाला समिति के अध्यक्ष देवीप्रसाद शेट्टी बेलापू ने कहा कि कम्बाला आयोजनों में काफी समय बर्बाद होता है क्योंकि कुछ भैंसों को दौड़ शुरू करने में लंबा समय लग जाता है, कभी-कभी एक या दो घंटे का समय जाया हो जाता है। जिससे आयोजनों के समापन में अत्यधिक देरी होती है। नई प्रणाली इस तरह की देरी को खत्म कर देगी और इसे 24 घंटे के भीतर पूरा करने में मदद करेगी।

दौड़ शुरू करने के लिए मिलेगा 5 या 10 मिनट का समय

उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत भैंस संचालकों को दौड़ शुरू करने के लिए 5 या 10 मिनट का समय मिलेगा। यदि वे दिए गए समय के भीतर दौड़ शुरू करने में विफल रहते हैं, तो रेफरी उन्हें एक और मौका देने या उन्हें अयोग्य घोषित करने पर निर्णय लेगा। नए सिस्टम में गेम शुरू होने के बारे में हैंडलर्स को सचेत करने के लिए ट्रैफिक लाइट्स (लाल, पीली और हरी) भी होंगी।

बढ़ेगी कंबाला की लोकप्रियता

शेट्टी ने कहा कि नई प्रणाली को पायलट आधार पर इकलाबा कांताबारे बुडुबारे कंबाला में पेश किया जाएगा जो 3 फरवरी को उडुपी जिले के इकला गांव में आयोजित किया जाएगा। इसकी सफलता के आधार पर, इसे भविष्य में सभी कंबाला आयोजनों तक विस्तारित किया जाएगा। शेट्टी ने उम्मीद जताई कि नई प्रणाली पारंपरिक खेल को उन्नत करेगी और इसे दुनिया भर में और अधिक लोकप्रिय बनाने में मदद करेगी।

मालूम हो कि नई व्यवस्था की शुरुआत के लिए अडाणी फाउंडेशन ने 10 लाख रुपए का दान दिया है।