
बेंगलूरु. बिहार से बाहर पार्टी विस्तार के लिए जमीन तलाश रहे जनता दल (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को कर्नाटक पहुंचे, जहां इस पार्टी का जन्म हुआ था। उनकी कोशिश राज्य में जद (यू) के पुनर्जन्म की है और इसी के तहत आगामी विधानसभा चुनावों में 25 से 30 उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी है। नीतीश कुमार ने अपने पहले कार्यकर्ता सम्मेलन में बिहार के विकास मॉडल की चर्चा की और राजनीति में शुचिता, सेवा, सांप्रदायिक सौहाद्र्र और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने वाली अपनी स्वच्छ छवि की पूंजी के सहारे राज्य में पार्टी की पैठ जमाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक से उनका विशेष लगाव रहा है क्योंकि वे लोहिया के समाजवादी विचारधारा से प्रभावित रहे हैं और यह राज्य समाजवादी आंदोलनों का गढ़ रहा है।
नीतीश की छवि ही उनकी असली पूंजी
इससे पहले राज्यसभा में जद (यू) के नेता आरसीपी सिंह, महासचिव संजय झा और राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने अपने संबोधन में नीतीश कुमार की छवि एक ऐसे ईमानदार और भ्रष्टाचार विरोधी नेता के रूप में की 'जो कहता है वह करता है।Ó
संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार जैसे नेता देश में बहुत कम बचे हैं तो आरसीपी सिंह ने पार्टी के दो धड़ों (शरद गुट) को लेकर उपजी भ्रम की स्थिति को दूर करने का प्रयास किया। सिंह ने कहा कि नीतीश के नेतृत्व वाली पार्टी ही असली जद (यू) है। वहीं भाजपा के साथ बिहार में गठबंधन को लेकर पार्टी का रूख साफ करते हुए कहा कि नीतीश को सांप्रदायिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि वे सिर्फ अल्पसंख्यक हितैषी कहने के लिए नहीं बल्कि कर दिखाने वाले हैं।
सांप्रदायिक सौहाद्र्र बिगाड़ा तो बर्दाश्त नहीं
उन्होंने कहा कि अपने शासनकाल में 'सामाजिक न्याय के साथ विकासÓ सुनिश्चत किया। इसका मतलब है कि हर व्यक्ति, हर समुदाय का विकास होना चाहिए और इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी विकास के क्षेत्र में किए गए अपने कार्यों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कुमार ने कहा कि वे बिहार में समाजिक सद्भाव और भाईचारा लाने में कामयाब रहे। उन्होंने भ्रष्टाचार से कभी समझौता नहीं किया और वे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे वालों से भी समझौता नहीं करेंगे। हाल के दरभंगा की घटनाओं पर बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि झगड़े होते रहते हैं लेकिन बिहार में दंगा नहीं हुआ। झगड़े को इतना तूल दिया गया जैसे कोई बहुत बड़ा दंगा हो गया हो। बिहार में शराबबंदी की सफलता गिनाते हुए उन्होंने कहा कि भले ही इससे राज्य की आय में 5 हजार करोड़ का नुकसान हुआ लेकिन आज लोग सड़कों पर शराब पीकर नहीं चलते। दावा किया जा रहा था कि शराबबंदी से पर्यटक कम हो जाएंगे लेकिन उनके राज्य में पर्यटकों की संख्या और बढ़ गई। नीतीश कुमार ने प्रदेश जद (यू) अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जेएच पटेल के पुत्र महिमा पटेल की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे यहां पार्टी को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें उन्हें सफलता जरूर मिलेगी।
देश में तनाव और टकराव का माहौल
बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ महागठबंधन तोड़कर भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार ने कहा कि आज देश में तनाव और टकराव का माहौल है। लोग काफी जुबान चला रहे हैं। काम कितना हुआ, इस पर किसी का ध्यान नहीं है। उन्हें लगता है कि देश में तरक्की तभी होगी जब शांति, भाइचारा और सद्भाव होगा। एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सद्भाव नहीं होगा तो देश आगे नहीं बढ़ेगा। लेकिन, यह ज्याद दिनों तक नहीं चलेगा। अंत में जीत उसी की होगी जो जनता के लिए खड़ा होगा। महात्मा गांधी ने कहा था कि सत्ता संभालने वाले नेता ट्रस्टी होते हैं और उन्हें जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए लेकिन, जो सत्ता के बहाने लोग संपत्ति अर्जित करने में लग जाते हैं। सत्ता निजी संपत्ति बढ़ाने के लिए नहीं होती है।
राजनीति में सही राह पर चलना जरूरी : पटेल
राज्य में जद (यू) को फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रहे प्रदेश अध्यक्ष महिमा पटेल ने कहा कि वे परिणाम को लेकर चिंतित नहीं हैं। यहां बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए महिमा पटेल ने प्रेम की राह अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में राह महत्वपूर्ण है। अगर आप सही रास्ते पर हैं तो परिणाम हमेशा बेहतर होगा। जेएच पटेल जो कहते थे वो करते थे और नीतीश कुमार भी ऐसे ही नेता हैं जो कहते हैं वो करते हैं। जद (यू) आज इस मुकाम पर इसलिए पहुंचा है क्योंकि यह जेएच पटेल और रामकृष्ण हेगड़े जैसे नेताओं के आदर्शों का अनुसरण करता है।

Published on:
12 Apr 2018 07:31 pm
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