जीवनभर की कमाई बच्चों के भविष्य पर खर्च कर दी। निजी नौकरी कर पाई-पाई जोड़कर जो पैसे इकट्ठे किए थे वे भी बेटे को दे दिए। अब मेरे पास कुछ नहीं है। फिर भी पुत्रवधु कहती है 'मंहगाई आसमान छू रही है, घर में रहना है तो खर्च में हाथ बंटाना होगा, वरना अपना इंतजाम कर लोÓ इकलौता बेटा है, वह भी उसकी सुनता है...। मैं कल भी रोती थी, जब बच्चा रोटी नहीं खाता था और आज भी रोती हूं जब बच्चा रोटी नहीं देता...। पढ़ लिखकर बच्चे कुछ बन जाएं, इसलिए एक कमरे के मकान में पांच बच्चों के साथ जिंदगी गुजार दी। आज पांच बच्चों के अलग-अलग घरों में मेरे लिए एक कमरा तक नहीं है...। बेटा और बहू जमीन-जायदाद उनके नाम करने के लिए प्रताडि़त करते हैं। मना करने पर कमरे में बंद कर देते हैं। कई दिन तक भोजन नहीं देते...।