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अहिंसा केवल हिंसा का निषेध ही नहीं

अक्कीपेट जैन स्थानक में उपाध्याय रवीन्द्र मुनि की धर्मसभा

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pravachan

अहिंसा केवल हिंसा का निषेध ही नहीं

बेंगलूरु. अक्कीपेट जैन स्थानक में उपाध्याय रवीन्द्र मुनि ने धर्मसभा में कहा कि सभी जीव सुख चाहते हैं, पीड़ाओं से मुक्ति सभी जीवों की आत्यंतिक कामना है। अहिंसा केवल हिंसा न करने का नाम नहीं है जो केवल निषेधपरक हो।
उन्होंने कहा कि अहिंसा का पूरा अर्थ समस्त प्राणियों के प्रति मैत्री का भाव रखना है। समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा करना, कष्ट में पड़े जीवों के कष्ट मुक्ति के लिए उनका मार्ग सरल करना और समाज, देश, जाति आदि की उन्नति के लिए कार्य करना।
अहिंसा के नामों में दया, रक्षा अभय आदि जो नाम हैं वो इसी को प्रगट करते हैं। जब हम अहिंसा की इस मूल भावना को देखते व समझते हैं तो हम पाते हैं कि समस्त सम्प्रदायों-उप सम्प्रदायों में यह भावना कम या ज्यादा रूप में पाई जाती है।
मुनि ने कहा कि हम देखते हैं कि संसार भर के सभी ग्रन्थों और सन्तों ने प्राणी रक्षा, जीवन मैत्री को एक स्वर से धर्म स्वीकार किया है, पर पता नहीं आज लोगों के सिर भूत सवार हो गया है कि वह हिंसा में जीवन की शांति और समाधान को खोज रहा है। आज पूरी दुनिया में कितने ही लोग हैं जिन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, घर, औषध और जीवन की अन्य आवश्यकताओं के घोर अभाव में जीना पड़ रहा है। संचालन संघ के अध्यक्ष सम्पतराज बडेरा ने किया।
कालिकम्मा देवी मंदिर में हुई विशेष पूजा
मंड्या. कलिकाम्मा देवी मंदिर में आषाढ़ माह के उपलक्ष्य में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस में स्थानीय व आसपास गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंदिर को विद्युत रोशनी व फूल मालाओं से सजाया गया।
साध्वियों का चातुर्मास प्रवेश 18 को
बेंगलूरु. साध्वी दिव्यज्योति, साध्वी दीप्तिश्री, साध्वी चंद्रकला की शिष्या अमितसुधा, सौम्याश्री, वैभवश्री, काव्यश्री आदि ठाणा 6 का चातुर्मास मंगल प्रवेश 18 जुलाई को वर्धमान स्थानक जैन संघ श्रीरामपुरम में होगा। संघ के अध्यक्ष शांतिलाल खींवेसरा के अनुसार वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर से सुबह 10 बजे मंगल विहार के दौरान नवयुवक मंडल, विजया महिला मंडल, आनंद बहु मंडल के सदस्यों से अधिकाधिक संख्या में शमिल होने की अपील की।