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जो सहन करना जानता है वीतराग बन सकता है-साध्वी डॉ. गवेषणाश्री

वीतराग पथ कार्यशाला का आयोजन

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जो सहन करना जानता है वीतराग बन सकता है-साध्वी डॉ. गवेषणाश्री

जो सहन करना जानता है वीतराग बन सकता है-साध्वी डॉ. गवेषणाश्री

बेंगलूरु. तेरापंथ युवक परिषद एचबीएसटी की ओर से वीतराग पथ कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ भवन हनुमंतनगर में साध्वी डाॅ.गवेषणाश्री के सान्निध्य में किया गया। श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन सभा अध्यक्ष तेजमल सिंघवी ने किया। तेयुप अध्यक्ष महावीर चावत ने सभी का स्वागत किया। महिला मंडल अध्यक्ष कांता धोका ने विचार व्यक्त किए। डॉ.साध्वी गवेषणाश्री ने कहा वीतराग कौन होता है-जाे क्षमासूर हाेते हैं। वीतराग वह बन सकता है-जो सहन करना जानता है। प्रतिक्रिया से मुक्त रहता है, ना किसी से राग न किसी से द्वेष करता है। तटस्थता के भाव मध्यस्थता के भाव ही वीतराग का पथ है। अनुकूल प्रतिकूल परिस्थिति में सम रहता है। पदार्थ के प्रति अनासक्ति की चेतना, द्रव्य, वस्तु, परिवार, समाज, सबके प्रति आसक्ति न हो । समभाव परिवर्तन की और गति हो कषायाग्नि का विराम हो तो एक दिन अवश्य वीतराग पथ पर बढ़ सकता है। साध्वी मयंकप्रभा ने कहा कि संयममय शुभभावाें से आप्लावित विमल हृदय, आत्मनियंत्रण, स्वसमीक्षण, स्वल्पभाषिता, ऋत्रुता शुद्ध चैतन्यमय सुवासित चित्त का नाम है- वीतराग। साध्वी मेरुप्रभा ने "वीतराग री भावना "सुमधुर गीतिका प्रस्तुत की। साध्वी दक्ष प्रभा ने "वीतराग पथ पर बढ़कर"गीतिका प्रस्तुत की। उपाध्यक्ष महावीर कटारिया, राहुल मेहता एवं सन्नी रांंका ने राजा श्रेणिक एवं अनाथी मुनि की लघु नाटिका को प्रस्तुत करते हुए संपूर्ण सदन को वीतरागमय भावों से ओतप्रोत कर दिया। सन्नी रांका ने वीतरागता के भावों से भरी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में महासभा से प्रकाश लोढ़ा, तेयुप गांधीनगर अध्यक्ष प्रदीप चोपड़ा,तेयुप यशवंतपुर अध्यक्ष कमलेश दक, तेयुप राजराजेश्वरीनगर से मंत्री विपुल पितलिया, परामर्शक बालचंद चावत, गौतम दक, महावीर बाेल्या, उपाध्यक्ष ललित बाफना, सहमंत्री देवेंद्र आंचलिया, सगंठनमंत्री नवरत्न बाेल्या, तेयुप सदस्यों सहित श्रावक-श्राविका समाज की उपस्थिति रही। संयोजक ललित बाेहरा का विशेष श्रम रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन सज्जनराज कटारिया ने किया। आभार कोषाध्यक्ष स्वरूप चोपड़ा ने ज्ञापित किया।