
चारित्र में ही आत्मा का मोक्ष हो सकता है
मैसूरु. महावीर जिनालय में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने उपधान तप में कहा कि जिस प्रकार हर रोडपति (भिखारी) को करोड़पति बनने के अरमान होते हैं उसी प्रकार हर श्रावक को चारित्रधर्म स्वीकार करके साधु बनने के अरमान होने चाहिए।
18 देशों के महाराजा कुमारपाल, परमात्मा की पूजा करके उनके पास एक ही प्रार्थना करते थे कि कब मैं चारित्र जीवन स्वीकार करके परमात्म कीसर्वोच्च आज्ञा का पालन करूंगा।
आज तक भूतकाल में जितनी आत्मा ने मोक्ष प्राप्त किया है, वर्तमान में जितनी आत्मा मोक्ष प्राप्त कर रही हंै और भविष्य में जितनी भी आत्मा मोक्ष प्राप्त करेंगी उन सब आत्माओं ने सम्यग दर्शन ज्ञान और चारित्र की आराधना की है।
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जहर के समान है अज्ञान
बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ में आचार्य महेंद्र सागर सूरी ने कहा कि संसार में जहर दो प्रकार का है। द्रव्य जहर तथा भाव जहर। बिच्छू सर्पादि का जहर और अफीम, तम्बाकू आदि का जहर द्रव्य जहर कहलाता है क्येांकि उसका साक्षात प्रभाव सिर्फ पुदगल पर होता है।
वहीं मनुष्यों एवं प्राणियों में जो अज्ञान का भाव विद्यमान है वह भाव जहर है क्योंकि उसका प्रभाव चेतना पर पड़ता है। द्रव्य जहर द्रव्य प्राणियों का घात करता है तो भाव जहर भाव प्राणों का विनाश करता है। द्रव्य जहर के प्रभाव से जीव एक बार ही मौत से विनाश होता है जबकि भाव जहर के प्रभाव से जीव को अनेक बार जन्मजन्मांतर हो जाता है।
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प्रकाश देने वाला है सम्यक ज्ञान
बेंगलूरु. बसवनगुड़ी में साध्वी प्रियरंजनाश्री ने कहा कि चारित्र पवित्र करें। सम्यग ज्ञान प्रकाश देने वाला है, परंतु प्रकाश किसको मिलता है, जिसकी आंखे हैं। उन्होंने कहा कि आंख नहीं है, तो प्रकाश का क्या लाभ? जैसे ज्ञान का कार्य है प्रकाश करना, वैसे ही चारित्र का कार्य है, शुद्धि करना।
ज्ञान सूर्य है, चारित्र जल है। आठ कर्मों का नाश करना है तो चारित्र की आराधना करो। चारित्र की आराधना से भव भव से मुक्ति मिलेगी। संयम का सार निर्वाण है। इस संसार का सार धर्म है। धर्म का सार सम्यग ज्ञान है।
सम्यगज्ञान का सार संयम और संयम का सार निर्वाण है। प्रवचन के दौरान अंतरिक्ष पाŸवनाथ की भावयात्रा का आयोजन हुआ। अहमदाबाद से आई टीम ने भावयात्रा कराई।

Published on:
24 Oct 2018 04:38 pm
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