
धमणा तपो वंदना का आयोजन
बेंगलूरु. आदिनाथ जैन श्वेताम्बर संघ व संभवनाथ जैन संघ की ओर से वीवीपुरम स्थित संभवनाथ जैन भवन में आचार्य जिनसुंदर सूरीश्वर, पंन्यास प्रवर कल्परक्षित विजय आदि ठाणा, साध्वी संवेगरत्नाश्री के सान्निध्य में सिद्धि तप व धमणा तपो वंदना का आयोजन किया गया। कार्याध्यक्ष बाबूलाल पारेख ने स्वागत किया। सचिव प्रकाश राठौड़ ने कार्यक्रम की रुपरेखा प्रस्तुत की। आचार्य ने तप की महिमा बताई। वीनित गोपवत ने संगीत प्रस्तुति दी। तपस्वियों के पचखाण व पारणे के चढ़ावे बोले गए।
350 विद्यार्थियों का दंत परीक्षण
बेंगलूरु. कर्नाटक मारवाड़ी यूथ फेडरेशन की ओर से संचालित मोबाइल दंत सेवा की ओर से विवेकानंद केंद्रीय विद्यालय, अनेकल में 350 विद्यार्थियों का दंत परीक्षण किया गया। यह जानकारी केएमवाईएफ के मंत्री प्रशांत ङ्क्षसघी ने दी।
सामायिक से होता है पापकारी प्रवृत्तियों का त्याग
बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ में आचार्य महेंद्र सागर ने कहा कि केवल ज्ञान प्राप्त होने के बाद तीर्थंकर भगवान भी सबसे पहले सामायिक धर्म का ही उपदेश देते हैं। सामायिक से पापकारी प्रवृत्तियों का त्याग होता है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति प्रतिदिन बीस मन सोने का दान करता है और एक व्यक्ति नित्य सामायिक करता है। तब भी दान देने वाला सामायिक करने वाले की बराबरी नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि सामायिक में रहा श्रावक साधु जैसा हो जाता है। जिस प्रक्रिया से समता की अभिवृद्धि होती हो, उसे ही सामायिक कहा जाता है।
स्वार्थी नहीं अपितु परमार्थी बनें
बेंगलूरु. नाकोड़ा पाŸवनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर में संत अभिनंदन सागर ने कहा कि स्वार्थी नहीं, परमार्थी बनेें। उसको मेरे लिए यह कहना चाहिए वह है स्वार्थ और मुझे उसके लिए यह करना चाहिए यह परमार्थ की भावना है। उन्होंने कहा कि स्वार्थ के जरिए हम संकुचित होते जाते हैं और परमार्थ से दिल फूल जैसा विकसित होता जाता है। जो व्यक्ति सिर्फ खुद का ही विचार करता है उसका विकास कैसे होगा?
Published on:
28 Aug 2018, 5:08 PM IST
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