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पटना का सुपरहीरो : प्रेम से लेकर दूसरे शहर में पलायन के दर्द का चित्रण

रंगमंच: नाटक पटना का सुपरहीरो (Patna Ka Superhero) का मंचन

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पटना का सुपरहीरो : प्रेम से लेकर दूसरे शहर में पलायन के दर्द का चित्रण

पटना का सुपरहीरो : प्रेम से लेकर दूसरे शहर में पलायन के दर्द का चित्रण

बेंगलूरु. हमारे हिसाब से इस दुनिया में तीन ही क्रांतिकारी हुए हैं कार्ल मार्क्स, भगत सिंह और पिंटू भैया... बस ऐसे ही शुरू होती है पटना के सुपरहीरो पिंटू भैया की कहानी। यह संवाद Nihal Parashar लिखित और निर्देशित नाटक पटना का सुपरहीरो (पिंटू भैया) का है। हाल ही में इस नाटक का मंचन शहर में हुआ।

छह फीट चार इंच का यह सुपरहीरो हमेशा कमजोर का साथ देता है। जो लोग पटना से हैं या फिर जिन लोगों ने यहां की गलियों और मोहल्लों में अपना बचपन बिताया है और पढ़ाई यहीं से पूरी की है, उनके लिए इस नाटक का मजा ही कुछ और है। शुरुआत से लेकर अंत तक इस नाटक में हर किसी के लिए घर ले जाने के लिए कुछ न कुछ है। अंत तक उत्सुकता बनी रहती है। अभिनय के लिहाज से मनोज (घनश्याम लालसा - Ghanshyam Lalsa) अंत तक सभी को बांधे रखते हैं। पटना के रूह को बखूबी पकड़ कर रखते हैं।

पिंटू भैया जीम में थोड़े ही न बनते हैं। वे तो बस होते हैं... छोटा भाई केवल शब्द नहीं एक जिम्मेदारी है.. प्यार के चक्कर में भैया किसी को पीटना ही भूल गए थे... भैया के आंखों से आंसू निकल रहा था। लेकिन, वे रोए नहीं...जैसे कथनों के बेहतरीन इस्तेमाल के कारण बीच-बीच में ठहाके लगने पर भी गंभीरता और उत्सुकता बनी रहती है। हास्य रस से परिपूर्ण यह नाटक भरपूर मनोरंजन के साथ सामाजिक ताने-बाने को भी खोल कर रख देता है।

रंगमंच और फिल्म अभिनेता Kumud Mishra निर्मित इस नाटक में कई पात्र हैं और घनश्याम लालसा ने दमदार अभिनय किया है। कहानी और अभिनय को दर्शकों ने जमकर सराहा। यह नाट्य कहानी प्यार की माया के बहाने समाज में व्याप्त विसंगतियों सहित पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी उजागर करती है। म्यूजिक हरप्रीत ने दिया है।

पर्दा उठने के कुछ देर बाद निशा स्वीट्स के बाहर भीड़ है। उच्च विद्यालय के दो लड़कों के बीच लड़ाई शुरू होने वाली होती है। तभी पिंटू भैया प्रवेश करते हैं। उनकी मौजूदगी से ही अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं। बिना किसी मारपीट के वे लड़ाई रोक देते हैं। आगे की कहानी पिंटू भैया के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। बाद में पिंटू भैया को मोहल्ले की स्वाति सिन्हा से प्यार हो जाता है और मनोज के साथ वे उसके घर के चक्कर काटने लगते हैं। कहानी का मोड़ उस समय आता है जब लड़की पिंटू भैया को खत भेजती है। इसके बाद पिंटू भैया सहित कहानी के सभी पात्रों की दुनिया बदल जाती है। प्यार की बेबसी और तड़प गहराई से महसूस होती है...। पराशर ने बताया कि उन्होंने नाटक के पात्रों के माध्यम से अपना शहर छोड़ दूसरे शहर जाने वालों की मनोस्थिति और व्यक्तित्व पर पडऩे वाले प्रभावों को भी दर्शाने की कोशिश की है।