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दीपावली पर सिर्फ दो घंटे पटाखे फोडऩे की अनुमति

सरकार ने जारी किए आदेश रात 8 से 10 बजे के बीच हो सकेगी आतिशबाजी

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दीपावली पर सिर्फ दो घंटे पटाखे फोडऩे की अनुमति

सूचना विभाग को जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाने का सुझाव
बेंगलूरु. राज्य सरकार ने दिवाली पर पटाखे फोडऩेे का समय निर्धारित कर दिया है। यह समय उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुसार तय किया गया है। राज्य सरकार की ओर से 2 नवम्बर की तारीख में जारी परिपत्र में कहा गया है कि पटाखे रात में केवल 8 बजे से 10 बजे तक ही फोडऩे की अनुमति दी जाएगी।
परिपत्र में कहा गया है कि राज्य प्रदूषण बोर्ड (केएसपीसीबी) दिवाली के अवसर पर पटाखे फोडऩे पर पूरी नजर रखेगा। इसके अलावा सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस आदेश का पालन कराएं और कड़ी नजर रखें। विशेष रूप से पुलिस विभाग को कहा गया है कि वह सुनिश्चित कराए कि 5 से 8 नवंबर के बीच रात 8 से 10 बजे के बीच ही पटाखे फोड़े जाएं। इसके अलावा लोगों से आग्रह भी किया जा रहा है कि वह कम से कम डेसिबल वाले पटाखे फोड़ें ताकि प्रदूषण नियंत्रित किया जा सके। धार्मिक स्थलों या अस्पतालों के नजदीक पटाखे नहीं जलाएं।
इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने रात 8 से 10 बजे का समय निर्धारित किया था। दक्षिणी राज्यों में भी दो घंटे के लिए ही पटाखे जलाने की अवधि निर्धारित की और राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत के आदेशों को पूर्ण रूप से पालन करवाने की बात कही है। राज्य सरकार ने सभी शहरी निकायों को निर्देश देकर कहा है कि वह दिवाली तथा अन्य त्योहारों पर सामुदायिक तरीके से पटाखे फोडऩे को प्रोत्साहित करें। इसके लिए शहरी निकाय संभावनाएं तलाशें और यह बताएं कि क्या ऐसे अवसरों के लिए एक निश्चित स्थान का चयन किया जा सकता है।
प्रदूषण बोर्ड से कहा गया है कि वह पूरी रात निगरानी रखे कि जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं उसका पालन हो रहा है या नहीं। प्रदूषण बोर्ड को दिवाली से 7 दिन पहले से लेकर 7 दिन बाद तक निगरानी करनी होगी। वे देखेंगे कि वातावरण में बेरियम, अल्युमीनियम, लोहा तथा अन्य प्रदूषक तत्वों का क्या स्तर है। इसके अलावा राज्य सरकार ने लड़ी वाले पटाखे पर प्रतिबंध लगाया है।
सरकार ने कहा है कि निर्धारित सीमा के भीतर ही शोर करने वाले पटाखों की बाजार में बिक्री की अनुमति होगी और उन्हें सिर्फ लाइसेंसदार ही बेच सकेंगे। लड़ी वाले पटाखे कुछ अधिकृत एवं लाइसेंसदार डीलर्स ही बेच सकेंगे। ये पटाखे सबसे ज्यादा शोर, ठोस कचरा और धुआं पैदा करते हैं इसलिए नहीं बेचे जाएंगे। इसके अलावा सूचना विभाग से कहा गया है कि वह स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए और पटाखे फोडऩे से संबंधित जोखिम के बारे में बताएं। इसके अलावा सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर भी जोर दिया है।