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हरी-भरी धरती के लिए किया पौध रोपण

कार्यक्रम में सोनू अग्रवाल एवं अनिल आलमपुरिया का सम्मान किया गया
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हरी-भरी धरती के लिए किया पौध रोपण

बेंगलूरु. स्थानीय कर्नाटक मारवाड़ी समाज की ओर से नंदी हिल्स के पास एक रिसोर्ट में हरी-भरी धरती-हरा भरा उपवन, पेड़ पौधे लगाकर पर्यावरण बचाएंगे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अध्यक्ष आनंद गिन्दोरिया के सान्निध्य में पौधरोपण किया गया। महिला मंडल की टीम ने हरियाली तीज हौजी, खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। कार्यक्रम में सोनू अग्रवाल एवं अनिल आलमपुरिया का सम्मान किया गया। सभी को एक-एक पौधा भेंट किया गया। मौके पर अमित केडिया, मोहित तुलस्यान, आनंद अग्रवाल, मनोज पोद्यार, अभिमन्यु छापोलिया, आनंद पोद्यार आदि मौजूद थे।


यूवीसीइ बनेगा उत्कृष्ट केंद्र
बेंगलूरु. बेंगलूरु विश्वविद्यालय के कुलपति व यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरय्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (यूवीसीइ) के पूर्व प्राचार्य डॉ. के. आर. वेणुगोपाल ने सोमवार को यूवीसीइ के शैक्षणिक सत्र की शुरुआत की। उन्होंने कहा, यूवीसीइ के नवीकरण व विकास के लिए प्रदेश सरकार ने 25 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।

यूवीसीइ को उत्कृष्ट केंद्र के तौर पर विकसति करने का लक्ष्य है।नए भवन के निर्माण के लिए मास्टर प्लान पर काम जारी है। नए छात्रावास का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होगा। छात्रावास में 1500 विद्यार्थियों के लिए जगह होगी।उन्होंने शिक्षकों से भी पढ़ाने के स्तर को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने और किताबों से बाहर सोचने की अपील की। यूवीसीइ के प्राचार्य डॉ. एच.एन.रमेश ने कहा, डिग्री के यूवीसीइ के सभी विद्यार्थियों को नौकरी मिलती है। इस मामले में यूवीसीइ प्रदेश के अग्रिम इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक है।

पानी के समान है आत्मा
बेंगलूरु. आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जयनगर में आचार्य कुमंदनंदी व मुनि अर्पण सागर के सान्निध्य में धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में आचार्य कुमुदनंदी ने कहा कि आत्मा कभी गंदी नहीं होती। इच्छाएं-आकांक्षाएं उसे गंदी बना देती हैं। आत्मा पानी के समान है। पानी गंदा नहीं होता बल्कि आप उसे गंदा बनाते हैं। फिल्टर करने के बाद पानी शुद्ध हो जाता है।

काजू, किसमिस खाते हैं, वही पेट में मल बन जाता है। वही मल खाद बनकर पौधों में डाला जाता है। वह फूल की सुगंध बन जाता है। उन्होंने कहा कि धरती में बहुत ऊर्जा है। वही खाद, वही गेहूं, चावल, दाल को शक्ति प्रदान करती है। त्याग, दान जितना ज्यादा करेंगे आत्मा उतनी ही फिल्टर होगी, शुद्ध बनेगी।

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