
साइबर ठगों का नया पैंतरा
बेंगलूरु. पुलिस ने एक साइबर क्राइम नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो लोगों को वाट्सएप और टेलीग्राम जैसे इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के जरिए संपर्क करके निवेश पर भारी रिटर्न का वादा करके धोखा देता था।
पुलिस ने कुल 84 खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें ठगी का पैसा भेजा गया था और उनसे 5 करोड़ रुपए बरामद किए गए हैं। हालाँकि, इन 84 खातों में कुल लेनदेन 854 करोड़ रुपए था, जिससे पता चलता है कि घोटाला कितने बड़े पैमाने पर हो रहा था। शहर के पुलिस आयुक्त बी. दयानंद ने शनिवार को कहा कि इन खातों की पहचान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 30 राज्यों से 5,013 समान शिकायतों के माध्यम से की गई। सिटी साइबर क्राइम पुलिस शहर में दर्ज इसी प्रकार की 17 शिकायतों की जांच कर रही थी, जिसमें पीडि़तों को कुल 49 लाख रुपए का नुकसान हुआ।
अब जबकि मॉड्यूल का भंडाफोड़ हो चुका है, शहर पुलिस ने केवल छह व्यक्तियों की एक शहर-आधारित टीम को पकड़ा है जो प्रति लेनदेन 1 से 3 प्रतिशत के कमीशन पर काम कर रही थी। इनके सरगना जो देश भर में या विदेश में भी ऐसी कई टीमों का संचालन कर रहे होंगे, उनकी अभी तक पूरी तरह से पहचान नहीं की जा सकी है। सूत्रों ने कहा कि यह उनके बड़े नेटवर्क का महज एक छोटा सा पुर्जा हो सकता है। दयानंद ने कहा कि हमने आंशिक रूप से उनकी पहचान स्थापित कर ली है और हम उनका पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं। यह गिरोह विभिन्न नामों के तहत सोशल मीडिया, वाट्सएप और टेलीग्राम एप्लिकेशन के माध्यम से भोले-भाले लोगों से संपर्क कर रहा था और उन्हें हाई रिटर्न के लिए पैसा निवेश करने को लुभा रहा था।
इस तरह मिला सुराग
एक महिला को अपने दोस्त से पता चला कि उसने वाइनग्रुप.लाइफ नामक ऐप में निवेश किया है और बड़ा मुनाफा कमाया है, उसने ऐप डाउनलोड किया और निवेश करने में रुचि दिखाई। उसने दो खातों और यूपीआई आईडी के एक सेट में विभिन्न भुगतानों में 8.5 लाख का निवेश किया, लेकिन फिर उन्हेें एहसास हुआ कि धोखा दिया गया है, तो उन्होंने अप्रैल 2023 में शिकायत दर्ज कराई।
इस मामले की जांच करते हुए उन सभी खातों को फ्रीज कर दिया गया, जिनके जरिए यह पैसा उड़ाया गया था। अधिकारियों को उन्हीं में से बेंगलूरु स्थित सुब्बू एंटरप्राइजेज का पता चला, जिसे फ्रीज किए गए तमिलनाडु स्थित खाते से पैसे का एक हिस्सा प्राप्त हुआ था। जब इस खाताधारक से पूछताछ की गई, तो पता चला कि यह एक किराए पर लिया गया खाता था। कभी-कभी तो खाताधारक को भी इसकी जानकारी नहीं होती कि उसके खाते का ऐसे किसी काम में उपयोग हो रहा है। इस मामले में पड़ात करने पर खाताधारक ने पुलिस को अपने एक दोस्त तक पहुंचाया, जिसने हाल ही में उससे बैंक खाते का विवरण लिया था।
वह दोस्त साइबर अपराध गिरोह का हिस्सा निकला। उससे पूछताछ में उन्हें पांच अन्य आरोपियों तक पहुंचाया, जो शहर से बाहर के थे, जिनमें से ज्यादातर की उम्र 20 साल के आसपास थी। उनमें से मुख्य आरोपी, जिसे अब गिरफ्तार कर लिया गया है, केवल सोशल मीडिया के माध्यम से इस घोटाले के सरगनाओं से जुड़ा था और वास्तविक जीवन में उसकी पहचान के बारे में कोई नहीं जानता। उसके निर्देशों पर कार्य करते हुए बाकी लोगों ने शहर में छह लोगों की एक टीम बनाई। कुछ ने शिकार फांसे और भाड़े के डमी खातों की व्यवस्था की, जबकि दूसरों ने शहर में लोगों से संपर्क किया और प्रत्येक सफल लेनदेन पर कमीशन के नाम पर धोखा दिया।
राष्ट्रव्यापी नेटवर्क की संभावना
दयानंद ने कहा कि अभी उन्होंने एक शहर पर आधारित टीम का भंडाफोड़ किया है, जो शायद एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का हिस्सा है। यह नेटवर्क उन्हीं 84 बैंक खातों के उपयोग से जुड़ा हुआ है, जिन्हें 5,013 मामलों में साइबर अपराधों में ठगे गए पैसे के प्राप्तकर्ता के रूप में चिह्नित किया गया है, वे अब सभी को लिखेंगे। अभी तक 30 राज्यों ने इन 84 खातों से जुड़े मामलों की सूचना दी है। उन्होंने कहा, घोटाले के सरगनाओं की पहचान के बारे में हमारे पास कुछ सुराग हैं। उनका पता लगाकर गिरफ्तार करने के लिए अन्य एजेंसियों के साथ काम करेंगे।
Published on:
30 Sept 2023 11:15 pm
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