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जनसंख्या आधारित परिसीमन दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय: खरगे

उत्तरी राज्यों का बढ़ेगा प्रतिनिधित्व, एकजुट होकर करें विरोध

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर की जाती है, तो यह दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा। इससे लोकसभा में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।

खरगे ने लोगों से इस कथित अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। पूर्व मंत्री केएच पाटिल के शताब्दी समारोह में उन्होंने शिक्षा पर कथित रूप से कम जोर देने और शैक्षणिक संस्थानों में बड़ी संख्या में रिक्तियों पर चिंता जताई और केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सहकारी संघवाद की बात करती है। अगर सहकारी संघवाद है, तो लोगों को वह धन क्यों नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं। क्या कर्नाटक में सहकारी समितियों को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से वह धन मिल रहा है जो उन्हें मिलना चाहिए। इसमें 58 प्रतिशत की कमी आई है।

यह अन्याय होगा

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य के लोगों से एकजुट होकर उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लडऩे का आग्रह किया। खरगे ने कहा कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन की योजना बनाई जा रही है। यह दक्षिण भारत में संसदीय और विधानसभा सीटों की संख्या कम करने का प्रयास है। इसके उलट उत्तरी राज्यों के प्रतिनिधित्व में 30 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं जिसपर गौर करना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो यह अन्याय होगा। इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।

संस्थानों में 50 प्रतिशत पद खाली

केंद्र सरकार पर विभिन्न संस्थानों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र को वह महत्व नहीं मिल रहा है जिसका वह हकदार है। शिक्षा के लिए केंद्रीय वित्त पोषण में कमी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, जितने पद भरे जाने चाहिए उतने नहीं भरे जा रहे हैं। चाहे वह नवोदय विद्यालय हों, केंद्रीय विद्यालय या विश्वविद्यालय, जितने शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए उनमें 50 प्रतिशत पद खाली हैं। यदि केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आइआइटी, आइआइएम और केंद्रीय विद्यालयों में 50 प्रतिशत पद खाली हैं, तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे और आगे बढ़ेंगे।