
प्रहलाद जोशी मंत्रिमंडल में शामिल, जातीय समीकरण को साधने की कवायद
बेंगलूरु. धारवाड़ संसदीय क्षेत्र से लगातार चौथी बार सांसद बने ५६ वर्षीय प्रहलाद जोशी केंद्रीय मंत्रिमंडल में पहली बार शामिल हुए हैं। ब्राह्मण जाति से आने वाले जोशी अपने आरंभिक दौर से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। उन्हें करीब तीस वर्षों के सार्वजनिक जीवन का अनुभव है। संघ और भाजपा के लिए सांगठनिक नेतृत्व में अग्रणी रहने के अतिरिक्त राजनैतिक मोर्चे पर भी जोशी ने अपनी काबिलियत दिखाई है।
वे भाजपा के कर्नाटक प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं और लोकसभा चुनाव २०१४ के दौरान उन्होंने राज्य में भाजपा का नेतृत्व किया था। प्रहलाद जोशी पहली बार वर्ष १९९४ में सुर्खियों में आए थे जब भाजपा नेता उमा भारती ने १५ अगस्त १९९४ को हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने की पहल की थी।
उस समय निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वाली भीड़ का नेतृत्व करने वालों में उमा भारती के साथ जोशी भी थे। तिरंगा विवाद में दस लोगों की पुलिस फायरिंग में मौत हुई थी। उस घटना के बाद जोशी ने हुब्बली-धारवाड़ सहित उत्तर कर्नाटक में भाजपा का जनाधार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
धारवाड़ संसदीय क्षेत्र में अपनी लोकप्रियता के बदौलत ही उन्होंने लगातार चौथी बार जीत हासिल की है। मोदी मंत्रिमंडल में जोशी को शामिल किए जाने की एक बड़ी वजह जातीय समीकरण भी है।
प्रहलाद जोशी को केंद्रीय मंत्री बनाकर राज्य के ब्राह्मणों के प्रभावशाली तबके को प्रतिनिधित्व देने की पहल की गई है। क्योंकि अब तक पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत अनंत कुमार को राज्य का बड़ा ब्राह्मण चेहरा माना जाता था। पिछले साल उनकी मौत के बाद पैदा हुई रिक्तता को भरने के लिए जोशी के बहाने ब्राह्मणों में भाजपा अपनी पैठ मजबूत करने के प्रयास में है।
Published on:
31 May 2019 06:57 pm
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