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घमंड मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु-आचार्य देवेंद्रसागर

धर्मसभा का आयोजन

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घमंड मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु-आचार्य देवेंद्रसागर

घमंड मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु-आचार्य देवेंद्रसागर

बेंगलूरु. घमंड मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, क्योंकि यह मनुष्य के सोचने-समझने की क्षमता को हर लेता है। उसकी बुद्धि भ्रष्ट कर देता है। अहंकार से ग्रस्त व्यक्ति अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझता और खुद को सर्वश्रेष्ठ सर्वेसर्वा समझता है। आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने जयनगर के धर्मनाथ जैन मंदिर में कहा कि चरित्र को पतन की ओर ले जाने वाली प्रवृत्तियों के चक्रव्यूह में फंसकर मनुष्य सर्वनाश की ओर चल देता है। अत: मनुष्य को अहम् भाव को त्याग कर सद्भाव और समभाव से जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में दु:ख का पर्याय भी अहंकार ही है। इसी घमंड के चक्रव्यूह में व्यक्ति स्वयं को श्रेष्ठ तथा हर क्षेत्र में ज्ञान व शक्ति से सम्पन्न मानने लगता है। वह इस नशे में इस हद तक डूबा रहता है कि दूसरे के ज्ञान अनुभव सलाह को तुच्छ समझने लगता है। संसार में अनगिनत जीव-जंतु हैं, उनमें सबसे कमजोर जीव में भी कोई न कोई एक जबरदस्त खूबी होती है, वो है अनुकरण। जिसके सहारे वह अपनी क्षमताओं में वृद्धि करता जाता है, परंतु घमंड के चक्रव्यूह से ग्रसित इंसान कभी किसी के अनुसरण को स्वीकार नहीं कर पाता। अंतत: एक ही परिणति को प्राप्त होता है, वह है सर्वनाश। जब व्यक्ति अहंकार के चक्रव्यूह में फंसा होता है तो नम्रता, बुद्धि, विवेक चातुर्य सभी गुण उससे दूर हो जाते हैं। उस व्यक्ति की नजर में हमेशा सभी लोग निम्न स्तर के ही होते हैं। सदैव दूसरों की राह में बाधा उत्पन्न कर प्रसन्न अनुभव करते हैं। औरों को गिराकर अपनी राह बनाने की चेष्टा करते रहते हैं। वे लोग अपने दंभ में इतनी वृद्धि कर लेते हैं कि कल्पना भी नहीं कर पाते कि एक दिन उनका पतन भी अवश्यंभावी है। जीवन में जब कठिनाइयां आएंगी तो उनके पास कौन खड़ा होगा। एक अभागे इंसान स्वरूप उन्हें एकाकी रहकर कष्टों के बीच जीवन-यापन करते हुए अंतत: पतन को प्राप्त होना ही पड़ेगा। कितना भी अच्छे व्यक्तित्व वाला इंसान भी अहंकार के चक्रव्यूह में घिरकर अपने समस्त गुणों को धुंधला कर लेता है। जैसे धधकते हुए अंगारों पर जमी राख की परत अग्नि को धुंधला कर देती है। दंभ का चक्रव्यूह एक मृगतृष्णा की भांति है, जिससे न उसकी प्यास शांत हो पाती है और ना ही औरों की। ऐसे लोग कई गलत धारणाओं में जीता है। जैसे वही एक बुद्धिमान है और बाकी में कमियां दोषों को गिनते गिनते परनिंदा में ही आनंद की अनुभूति करता रहता है।