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निजी अस्पतालों को अग्रिम भुगतान के बिना भी उपचार देना होगा : स्वास्थ्य मंत्री

-रेबीज मुक्त कर्नाटक और सर्पदंश नियंत्रण के लिए राज्य कार्ययोजना शुरू रेबीज और सर्पदंश Rabies and snakebite के मामलों में निजी अस्पतालों को भी बिना अग्रिम भुगतान लिए तत्काल उपचार उपलब्ध कराना होगा। यह बातें स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री दिनेश गुंडूराव ने रोग निगरानी कार्यक्रम के तहत सर्पदंश रोकथाम एवं नियंत्रण तथा रेबीज मुक्त […]

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रेबीज

स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री दिनेश गुंडूराव ने रोग निगरानी कार्यक्रम के तहत सर्पदंश रोकथाम एवं नियंत्रण तथा रेबीज मुक्त कर्नाटक राज्य कार्ययोजना का शुभारंभ किया।

-रेबीज मुक्त कर्नाटक और सर्पदंश नियंत्रण के लिए राज्य कार्ययोजना शुरू

रेबीज और सर्पदंश Rabies and snakebite के मामलों में निजी अस्पतालों को भी बिना अग्रिम भुगतान लिए तत्काल उपचार उपलब्ध कराना होगा। यह बातें स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री दिनेश गुंडूराव ने रोग निगरानी कार्यक्रम के तहत सर्पदंश रोकथाम एवं नियंत्रण तथा रेबीज मुक्त कर्नाटक राज्य कार्ययोजना का शुभारंभ करने के बाद कही।

शून्य तक लाने का लक्ष्य

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2030 तक रेबीज से होने वाली मौतों को शून्य तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य की कार्ययोजना के तहत सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, तालुक और जिला अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन तथा रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दवाओं का पर्याप्त भंडारण रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर संयुक्त समितियों का गठन किया गया है।

अधिसूचित बीमारी की सूची में शामिल

विभिन्न सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से इस योजना को लागू किया जाएगा। विषैले सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने के लिए भी विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाई गई इस योजना के तहत वर्ष 2024 में सर्पदंश के सभी मामलों को अधिसूचित बीमारी की सूची में शामिल किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश के मामलों में भी मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। निजी अस्पतालों को बिना अग्रिम राशि लिए तत्काल जीवन रक्षक उपचार देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही दवाओं की उपलब्धता, चिकित्साकर्मियों का प्रशिक्षण और जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि सर्पदंश से होने वाली मृत्यु और विकलांगता को प्रभावी रूप से कम किया जा सके।