वैज्ञानिकों को मिले गुरुत्वाकर्षण तरंगों और गामा किरणों को न्यूट्रॉन तारों से जोडऩे वाले सबूत

वैज्ञानिकों को मिले गुरुत्वाकर्षण तरंगों और गामा किरणों को न्यूट्रॉन तारों से जोडऩे वाले सबूत

Shankar Sharma | Publish: Oct, 17 2017 04:03:43 AM (IST) Bangalore, Karnataka, India

वैश्विक स्तर पर अलग-अलग परियोजनाओं पर काम कर रहे दुनिया भर के वैज्ञानिकों को पहली बार ऐसे सबूत मिले हैं जिनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि

बेंगलूरु. वैश्विक स्तर पर अलग-अलग परियोजनाओं पर काम कर रहे दुनिया भर के वैज्ञानिकों को पहली बार ऐसे सबूत मिले हैं जिनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि उपग्रहों के पास दिख रहे शॉर्ट गामा रे बर्स्ट्स (गामा किरणों से निकलने वाली रोशनी) एक-दूसरे से टक्कर खाते न्यूट्रॉन तारों की वजह से उत्पन्न होते हैं। इस बात पर अभी तक सिर्फ सैद्धांतिक जानकारी ही थी। इस खोज के साथ ही अब ब्रह्मांड के विस्तार होने की दर का पता लगाया जा सकेगा।

लेजर इंटरफियरोमीटर ग्रैविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (एलआईजीओ) से जुड़े वैज्ञानिकों ने इस घटना को ग्रैविटेशनल-वेव मल्टीमेसेंजर ऐस्ट्रॉनमी की शुरुआत बताया है। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत 17 अगस्त 2017 को हुई थी। तब अमरीका आधारित एलआईजीओ और यूरोप आधारित वरगो ने पहली बार एक-दूसरे से टकराते न्यूट्रॉन स्टार्स से ग्रैविटेशनल वेव्स (गुरुत्वाकर्षण तरंगें) पैदा होती देखी थीं।


एलआईजीओ के साथ काम कर रहे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की ओर से संचालित बेंगलूरु की इंटरनेशनल सेंटर फार थियोरॉटिकल सांइजेस (आईसीटीएस) के वैज्ञानिक परमेश्वरन अजीत ने बताया कि यह गुरुत्वाकर्षण तरंगों के पहली बार पाए जाने जितनी बड़ी घटना है। अभी तक चार गुरुत्वाकर्षण तरंगों को खोजा गया है। पहली बार 2015 में खोजी गई गुरुत्वाकर्षण तरंगों के लिए इस साल भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया।


बताया गया है कि 1 अगस्त की गुरुत्वाकर्षण तरंगें अब तक की सबसे मजबूत तरंगें थीं। यह पृथ्वी से 130 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित थीं। इन्हें दुनियाभर के टेलिस्कोप्स की सहायता से देखा जा सका। यह टेलिस्कोप न्यूट्रॉन्स की टक्कर से उत्पन्न हुए विकिरण पर अध्ययन कर रहे थे।


आइंस्टीन के सिद्धांत की पुष्टि
गुरुत्वाकर्षण तरंगों और गामा रेज के 130 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित स्रोत से पैदा होकर लगभग एक ही समय पर पहुंचने से अल्बर्ट आइंस्टाइन का वह सिद्धरांत भी सिद्ध होता है जिसमें उन्होंने गुरुत्वाकर्षण तरंगों के प्रकाश की गति से चलती हैं।


वैज्ञानिकों ने बताया कि इन सभी ऑब्जर्वेशन्स की मदद से ब्रह्मांड के विस्तार की दर का पता भी लगाया जा सकेगा। बाद में अस्ट्रॉनमर्स ने आसमान में स्थित घटना के स्रोत का इलेक्ट्रोमैग्नटिक रेडिएशन के अलग-अलग रूपों, जैसे एक्स-रे, अल्ट्रावायलट, ऑप्टिकल, इन्फ्रारेड और रेडियो वेव में अध्ययन किया।


इन सब अध्ययनों से पता चला कि कुछ शॉर्ट गामा रे बर्स्ट्स न्यूट्रॉन्स के टकराने से पैदा होते हैं। यह बात अभी तक केवल थिअरी में सीमित थी। इन अध्ययनों से नए एलिमेंट्स के पैदा होने का भी पता चलता है। इससे साबित होता है कि आधे एलिमेंट्स की उत्पत्ति ऐसी टक्करों के कारण होती है।

क्या होते हैं न्यूटॉन तारे

न्यूट्रॉन तारे सबसे छोटे और सबसे घने तारे होते हैं। यह तब पैदा होते हैं जब बड़े स्टार्स में धमाका होता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि न्यूट्रॉन तारे सूर्य से भी अधिक वजन के होते हैं लेकिन इनका व्यास (डायमीटर) केवल 20 किमी होता है। वहीं सूर्य का व्यास लगभग 13.9 लाख किमी होता है। यह इतने घने होते हैं कि एक चम्मच न्यूट्रॉन तारे का वजन माउंट एवरेस्ट से भी अधिक होता है। इनका वजन सूर्य का भी 1.1 से लेकर 1.6 गुना होता है।

वैज्ञानिकों ने इन्हें एक दूसरे की तरफ 100 सेकंड तक घूमते-घूमते आते और फिर टकराते देखा। उन्होंने बताया कि गुरुत्वाकर्षण तरंगों के दो सेकंड बाद ही पृथ्वी का चक्कर काट रहे उपग्रहों ने न्यूट्रॉन तारों के कारण पैदा हुई गामा तरंगों को देखा। इससे यह पुख्ता तौर पर कहा जा सकता है कि उपग्रह के पास देखे जाने वाले शॉर्ट गामा बस्ट्र्स न्यूट्रॉन स्टार्स की टक्कर की वजह से ही उत्पन्न होते हैं।

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