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मीठी वाणी से मिटता है झगड़ा: डॉ.कुमुदलता

श्रीरंगपट्टण में प्रवचन

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बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टण के दिवाकर मिश्री गुरु राज दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता ने कहा कि कड़वी बोली संसार में हमेशा झगड़ा ही कराती है और मीठी वाणी झगड़े को मिटाती है। जुबान अच्छी है तो सब अच्छा है और जुबान खराब है तो सब खराब। हमें अपनी वाणी का सदुपयोग कर घर को आनंद भवन बनाना चाहिए।

साध्वी ने कहा कि व्यक्ति चाहे कितना भी तपस्वी हो या योगी भी क्यों न हो अगर उसकी वाणी में मिठास नहीं है तो वह किसी के भी प्यार का पात्र बन ही नहीं सकता। वास्तव में वाणी को संयम में रखने वाला व्यक्ति ऊंचाइयों तक पहुंच जाता है। इसके विपरीत अनियंत्रण वाणी वाले व्यक्ति को प्राय: जीवन भर सफलता प्राप्त नहीं हो पाती। जो व्यक्ति वाणी से सदा मीठा बोलता है उसके मित्रों का क्षेत्र भी विस्तारित होता है। जो लोग मन बुद्धि व ज्ञान की छलनी में छान कर वाणी का प्रयोग करते हैं वे ही हित की बातों को समझते हैं और वे ही शब्द और अर्थ के संबंध ज्ञान को जानते हैं।

जो व्यक्ति बुद्धि से शुद्ध वचन का उच्चारण करता है वह अपने हित को समझता ही है जिससे बात कर रहा है उसके हित भी समझता है। वाणी में आध्यात्मिक और भौतिक, दोनों प्रकार के ऐश्वर्य हैं। मधुरता से कही गई बात कल्याण कारक रहती है, किन्तु वहीं कटु शब्दों में कही जाए तो अनर्थ का कारण बन जाती है।

उन्होंने कहा कि ईश्वर ने हमें धरती पर प्रेम फैलाने के लिए भेजा है और यही हर धर्म का संदेश है। यह वाणी ही है जिससे किसी भी मनुष्य के स्वाभाव का अंदाजा होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि बातचीत के लहजे से ही व्यक्तित्व का सही अंदाजा लगाया जा सकता है।