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पृथ्वी के निकटतम ग्रह पर पहुंचने की मची होड़

अगले दो साल में दस मिशन लाॅन्च करने की तैयारी में अंतरिक्ष शक्ति संपन्न देश छह मिशन चक्कर लगा रहे हैं चांद की कक्षा में रूस का लूना भी लॉन्च, 16 अगस्त को पहुंचेगा चांद पर

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पृथ्वी के निकटतम ग्रह पर पहुंचने की मची होड़

पृथ्वी के निकटतम ग्रह पर पहुंचने की मची होड़

राजीव मिश्रा

बेंगलूरु. नासा के आर्टेमिस मिशन और मंगल पर उपनिवेशीकरण की तैयारी के चलते अगले कुछ वर्षों के दौरान चांद पर गतिविधियां तेज होंगी। चंद्रमा और मंगल अभी तक सौरमंडल के दो ऐसे पिंड हैं जिन पर सबसे अधिक मिशन भेजे गए। अभी तक इन मिशनों का उद्देश्य अन्वेषण था। लेकिन, अब भविष्य के मिशनों में इन पिंडों पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के व्यवसायिक उपयोग का उद्देश्य शामिल होने लगा है। आर्टेमिस मिशन का उद्देश्य चांद पर सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना नहीं है। अमरीका चांद पर अधिक समय बिताना चाहता है और उसकी सतह पर खुदाई कर लूनर बेस बेस बनाने की तैयारी कर रहा है। चीन का मिशन चांग-5 चांद की सतह से नमूने लेकर वापस आया। चीन भी अब 2030 तक चांद पर अपना पड़ाव स्थापित करना चाहता है।
चांद पर पहुंचने की होड़ में कोई भी अंतरिक्ष शक्ति संपन्न देश पीछे नहीं छूटना चाहता। चंद्रयान-2 के बाद भारत का चंद्रयान-3 मिशन चांद पर उतरने वाला है। रूस ने भी शुक्रवार को लगभग 5 दशक बाद अपना लूना-25 मिशन लाॅन्च किया, जो संभवत: 16 अगस्त को चांद की कक्षा में पहुंचेगा और 21 से 23 अगस्त के बीच चांद की धरती पर उतरेगा। भारत का चंद्रयान-3 भी 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। फिलहाल चंद्रयान-3 को छोड़ कर छह मिशन चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं। वहीं, अगले दो वर्षों में चंद्रमा पर कम से कम 10 मिशन भेजने की तैयारी है।

तीन बार हुआ चंद्रयान-2 का मैनुवर

चांद पर बढ़ते उपग्रहों की संख्या भविष्य में एक नई चुनौती पेश करेगी। पृथ्वी की नजदीकी कक्षा में उपग्रहों और बेकार पड़े अंतरिक्षीय मलबे गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं। लेकिन, चंद्रमा पर उपग्रहों की बढ़ती संख्या के कारण उन्हें प्रबंधित करना बेहद मुश्किल होगा। इसरो वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के काफी दूरी होने के कारण चांद की कक्षा में उपग्रहों और मलबों को ट्रैक करना काफी मुश्किल होता है। चांद की कक्षा में चंद्रयान-2 का आर्बिटर सितंंबर 2019 से चक्कर लगा रहा है और दूसरे मिशनों से टकराव टालने के लिए तीन बार उसका मैनुवर हो चुका है। वर्ष 2008 में भारत का भेजा गया चंद्रयान-1 मिशन और जापान का ऊना मिशन दो बेकार उपग्रह हैं जो चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं। ये चांद पर एक मलबे के समान हैं।