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बेंगलूरु।आर्थिक तंगी, गरीबी की मार और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद राज्य बोर्ड बारहवीं (द्वितीय) की परीक्षा के कला संकाय में प्रदेश में टॉप करने वाली बल्लारी जिले के इंदु पीयू कॉलेज की अनिता बसप्पा को लुंकड़ परिवार के रूप में 'मांझीÓ मिल गया है। गरीबी के समुद्र के बीच मझधार में फंसी अनिता के पढ़ाई की नैया लुंकड़ परिवार पार लगाएगा। अनिता कला मेें स्नातक कर राज्य प्रशासनिक सेवा (केएएस) की अधिकारी बनना चाहती है लेकिन अब लुंकड़ परविार ने अनिता के स्नातक की पढ़ाई सहित केएएस की तैयारी कराने की जिम्मेदारी उठा ली है। कुछ दिन पहले अनिता का दाखिला उसी कॉलेज के बीए कला संकाय में हुआ जहां से उसने टॉप किया था।
दाखिला लुंकड़ परिवार ने कराया है। पत्रिका में अनिता की सफलता और उसके पिता के मेहनत की खबर पढ़कर अखिल भारतीय तेरापंथ युवा परिषद के पूर्व महामंत्री हनुमान चन्द लुंकड़ ने पत्रिका के माध्यम से अनिता के परिवार से मुलाकात की थी। लुंकड़ ने बताया कि अनिता एक मेधावी छात्रा है। उसमें असंभव को भी संभव करने की क्षमता है। लुंकड़ ने बताया कि अपने माता-पिता के नाम पर गरीब मेधावी विद्यार्थियों के लिए वे एक ट्रस्ट बनाना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। गत तीन वर्षों से वे 'पढ़ाईÓ कार्यक्रम के तहत ऐसे विद्यार्थियों की छोटी-मोटी मदद करते आ रहे हैं। गरीब 300 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं।
अनिता और उसके परिवार ने लुंकड़ परिवार व पत्रिका के प्रति अपना आभार जताया। अनिता ने बताया कि आर्थिक सहयोग मिलने से वह बेहद खुश है। गौरतलब है कि 26 मई को पत्रिका ने अनिता की उपलब्धियों को लेकर 'केला बेचने वाले की बेटी टॉपरÓ शीर्षक खबर प्रकाशित की थी। बस अड्डों और गलियों में घूम-घूमकर केला बेचने वाले पिता ने आर्थिक तंगी और तमात विपरीत परिस्थतियों के बीच बेटी अनिता को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अनित ने 600 अंकों में से 597 अंक प्राप्त कर कला संकाय में पूरे प्रदेश में टॉप किया।
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