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संबंधों को निभाने में विवेक जरूरी

सीआइटीबी परिसर में श्रुत मुनि के प्रवचन

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dharm karm

संबंधों को निभाने में विवेक जरूरी

मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर के सीआइटीबी परिसर में श्रुत मुनि ने 'आओ सुश्रावक बनेÓ का वर्णन करते हुए कहा कि श्रा अर्थात जीवन में श्रद्धा माता पिता के प्रति धर्म के प्रति देवगुरु, धर्म के प्रति श्रद्धा का समावेश होना, व का अर्थ जीवन में विवेक का समावेश करना अर्थात यतना, यतना ही धर्म है। विवेक में रहना, खाना, पीना, चलना, व्यापार करना, संबंधों को निभाने में विवेक का प्रयोग करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूजा धन, पद या व्यक्ति की नहीं होती है। पूजा तो व्यक्ति के विवेक की एवं गुणों की होती है। विवेक अर्थात ज्ञानचक्षु। क का अर्थ कर्तव्यवान बने। हमारा कर्तव्य है समाज को सहयोग करना, परिवारजनों के प्रति कत्र्तव्य का निर्वहन करना, संतान को योग्य शिक्षा देना, धन अर्जन न्यायपूर्ण हो, परिवारजनों को धार्मिक एवं आत्मिक कार्यो के प्रति जोडऩा चाहिए। इन बातों का जो ध्यान रखता है, वह श्रावक सुश्रावक बन जाएगा। युवा संगठन ने रोहिण्या चोर एवं अभयकुमार की जीवनी पर नाटिका प्रस्तुत की। सम्मेलन में केजीएफ, बेंगलूरु, चेन्नई, हैदराबाद, उदयनगर, मंड्या, हुन्सुर, नंजनगुड, गुन्डलपेट, पाण्डवपुरा, विद्यारण्यपुरा एवं सिटी संघ के श्रावक उपस्थित थे। मुनि ने सभी को सुश्रावक बनने के प्रति जागरूक किया। मंगलाचरण से शुरू हुए कार्यक्रम में राकेश मेहता, दिनेश पीपाड़ा, शशांक कोठारी ने स्वागत गीत पेश किया। संघ अध्यक्ष सम्पत कोठारी ने स्वागत किया। सहमंत्री भेरुलाल कोठारी ने धन्यवाद दिया। अक्षर मुनि की 23 तपस्या गतिमान है। संचालन प्रमोद श्रीमाल ने किया।
आचार्य महाश्रमण के दर्शन किए
मंड्या. तेरापंथ सभा, अणुव्रत समिति, तेरापंथ महिला मंडल और युवक परिषद के प्रतिमंडल ने चेन्नई में आचार्य महाश्रमण व साध्वी कनकप्रभा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। उपासक पदमचंद आचलिया नें ज्ञानशाला के बच्चों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अणुव्रत समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार भंसाली, तेरापंथ सभा अध्यक्ष प्रकाश भंसाली ने आचार्य से मंड्या में कार्यक्रम देने की विनती की। कार्यक्रम में महिला मंडल के सदस्यों ने गीतिका पेश की।