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लिंगायत विकास निगम स्थापित करने का अनुरोध

कर्नाटक लिंगायत जागृति समिति ने राज्य सरकार से लिंगायत धर्म की 99 उपजातियों को सम्मिलित कर लिंगायत विकास निगम की स्थापना करने का आग्रह किया है।

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लिंगायत विकास निगम स्थापित करने का अनुरोध

लिंगायत विकास निगम स्थापित करने का अनुरोध

हुब्बल्ली. कर्नाटक लिंगायत जागृति समिति ने राज्य सरकार से लिंगायत धर्म की 99 उपजातियों को सम्मिलित कर लिंगायत विकास निगम की स्थापना करने का आग्रह किया है। शहर के पत्रकार भवन में सोमवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में समिति की अध्यक्ष तारादेवी वाली ने कहा कि लिंगायत समाज वैश्विक स्तर पर चिन्हित हुआ है।

हाल ही के दिनों में समाज आर्थिक तौर पर कमजोर तथा शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित हुआ है। इसके अलावा सरकारी योजनाएं दूर की कौड़ी बनी हुई हैं। मौजूदा हालात में राज्य में सत्ता में आई कांग्रेस-जद (ध) गठबंधन सरकार से स्व. देवराज अरस, डॉ. अम्बेडकर निगम की तर्ज पर कर्नाटक राज्य लिंगायत विकास निगम की स्थापना करने का आग्रह किया।


उन्होंने कहा कि हजारों जाति, उपजातियों का संगमस्थली राज्य में अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए प्राधिकरण, निगम मंडल का गठन कर इनके क्षेत्र में आने वाले समुदायों को आर्थिक, शैक्षणिक, औद्योगिक मदद उपलब्ध करना बेहत सराहनीय है। इससे लाखों परिवारों को वित्तीय मदद से समाज की मुख्यधारा में चिन्हित करने का मौका मिला है।


संवाददाता सम्मेलन में राज्य विद्याश्रम के षडाक्षरी स्वामी, समिति के गंगाधर दोड्डवाड, अनसूया होरकेरी, शारदा हुइलगोल, रेखा रित्ती, शेखण्णा होरकेरी आदि उपस्थित थे।

दुर्गुण दूर करते हैं वीतरागी प्रभु के दर्शन
धारवाड़. जैन आचार्य महेंद्रसागर सूरि ने कहा कि संसार में यदि कोई आशा की किरण है तो वह है जिनेश्वर प्रभु। वे सोमवार को श्री शीतलनाथ जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ में आयोजित धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैन जहां भी जाएं या जहां भी रहें उनकी भावना रहती है कि प्रभु दर्शन और प्रभु पूजा से उनके दिन की शुरुआत हो, जिनालय के करीब ही निवास स्थान हो।

आज के इस आपाधापी के समय में यह भावना फलीभूत न हो सके तब भी जैन के हृदय में एक भावना झंकृत होती है कि वह नित्य जिनालय पहुंचकर दर्शन करे व वीतरागी प्रभु के दर्शन पूजन में निहित अनंत दुर्गुणों को दूर करे। प्रभु से प्रेम रखेंगे तो घर में भी प्रेमपूर्ण माहौल बना रहेगा इसलिए यदि घर परिवार में प्रेम चाहते हो तो प्रभु से प्रेम बना ही रहना चाहिए।