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हर भाषा का सम्मान जरूरी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से बेंगलूरु विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से समकालीन हिंदी साहित्य -चेतना के स्वर विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन बीयू के कुलपति प्रो. के. आर. वेणुगोपाल ने किया।

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हर भाषा का सम्मान जरूरी

हर भाषा का सम्मान जरूरी


बेंगलूरु. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से बेंगलूरु विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से समकालीन हिंदी साहित्य -चेतना के स्वर विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन बीयू के कुलपति प्रो. के. आर. वेणुगोपाल ने किया। जिसके बाद उन्होंने हिंदी में संबोधित करते हुए हर भाषा को महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. चंद्रशेखर रेड्डी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने भी हर भाषा के सम्मान पर जोर दिया।

ऋषियों ने की है जैन शासन की रक्षा

बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ में आचार्य महेन्द्रसागर ने कहा कि अवसर्पिणी काल के पांचवें आरे में वातावरण हर तरह से दूषित हुआ है। आगे भी ज्यों-ज्यों समय बीतेगा त्यों-त्यों अधिक दूषित बनता जाएगा। बावजूद इसके प्रभु का शासन मिला है और वह भी उसके मूल स्वरूप में मिला है। ये अपना परम सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि उपकार उन ऋषियों-मुनियों-धर्माचार्यों और शासन भक्तों का है जिन्होंने प्राणों की आहुति देकर भी जैन शासन की रक्षा करके अपने तक पहुंचाया है। ऐसे विषम काल में आत्महित को याद रखना, मोक्ष का लक्ष्य हृदय में रखना, धर्म प्रेम जीवंत रखना, आत्मा को बचा लेना कठिन है। भगवान महावीर प्रभु अंतिम देशना में यही बात कह गए।

तप में दूसरों को न करें परेशान
मैसूरु. सिटी स्थानक में विराजित डॉ. समकित मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र का विवेचन करते हुए कहा कि तप के माध्यम से करोड़ों वर्षों के संचित पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं। तप करने की भी कला होती है।


उन्होंने कहा, यदि तप विधि से ना किया जाए तो उसका प्रभाव ज्यादा नहीं होता। तप में दूसरों को परेशान नहीं करना, असत्य का त्याग करना, छीना-झपटी नहीं करनी चाहिए। छीना-झपटी वही करता है जिसे अपने पुण्य पर भरोसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि आसक्ति का त्याग करके प्रवचन माता की साधना करना तप करने की कला है। जब इन बातों को ध्यान में रखकर तप किया जाता है तब ऐसे तप से मन वांछित फल की प्राप्ति होती है। युवा संगठन अध्यक्ष राजन बाघमार ने बताया कि डॉ. समकित मुनि के सान्निध्य में ५ नवम्बर से पंचदिवसीय कार्यक्रम शुरू होंगे। प्रथम दिन भगवान महावीर के केवलरूप से निर्वाण तक की कथा का वाचन होगा।