12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

धूल साफ करने की मशीनों पर रार

पालिका चाहती है और मशीनें लाई जाएं, पार्षद और सफाईकर्मी खिलाफ, फिलहाल ८ बड़ी और १ छोटी मशीन लगी हैं सफाई के काम पर

2 min read
Google source verification
dust

परेशानी... गुरुवार को शहर के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास महात्मा गांधी चौराहे पर सड़क किनारे चल रहे काम के कारण उड़ रही धूल से वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सड़कों और इमारतों को अपने गुबार से धुंधलका बनाती धूल शहर में वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार प्रमुख कारकों में से एक है। वायु प्रदूषण का २० प्रतिशत से अधिक हिस्सा सड़कों से उड़ती धूल से आता है, जोकि वाहनों के उत्सर्जन की ४२ फीसदी हिस्सेदारी के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। धूल को पूरी तरह सड़क से साफ करने के लिए बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) ने मशीनें खरीदी हैं, अब निकाय चाहता है कि और मशीनें खरीदी जाएं, लेकिन इस मंतव्य का विरोध हो रहा है।
एक ओर बीबीएमपी ने परिवहन विभाग और बेंगलूरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) से अनुरोध किया है कि वह वाहन उत्सर्जन को कम करने के उपाय करें और बीएमटीसी के बेड़े की बसों को २ स्ट्रोक इंजन की बजाय ४ स्ट्रोक में उन्नत करे। दूसरी तरफ नगरी निकाय ने सड़कों की धूल कम करने के लिए स्वयं भी कार्ययोजना के तहत कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है।
बीबीएमपी आयुक्त मंजूनाथ प्रसाद ने कहा कि सड़कों की धूल का वायु प्रदूषण में बहुत बड़ी भूमिका है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। धूल का स्तर बढ़ रहा है, ऐसे में पालिका ने तकनीकी का प्रयोग करने का निर्णय किया है और पिछले साल मई से नौ मशीनी स्वीपर लगाए गए हैं, जिनमें आठ बड़े और एक छोटा है। बड़ी मशीनें एक समय में ५० किलोमीटर तक सड़क साफ करने में सक्षम है, जबकि छोटी मशीन की क्षमता ३० किमी है। यातायात व्यवस्था में किसी प्रकार की अड़चन न हो इसलिए ऐ मशीनें एक दिन के अंतराल में रात्रि १० बजे से सुबह ४ बजे के दौरान सड़कों की सफाई करती हैं। इन मशीनों में जीपीएस और वीडियो रिकार्डिंग की भी सुविधा है, साथ ही चालक की मदद के लिए मानचित्र उपलब्ध है।

पूरे शहर में मशीनों के उपयोग का दबाव
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मशीनों के माध्यम से ही शहर की सभी प्रमुख सड़कों की सफाई के लिए लोगों ने पालिका पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसका कारण है कि मशीनें सड़कों पर मौजूद धूल के प्रत्येक कण को बड़ी सटीकता के साफ करती हैं, जबकि सामान्य सफाईकर्मियों द्वारा झाड़ुओं से प्रभावी सफाई नहीं होती और धूल के कण बरकरार रहते हैं।
नौकरी खोने की आशंका से विरोध
पालिका ने जब भी शहर की प्रमुख और उनकी संबद्ध सड़कों में इन मशीनों के द्वारा सफाई की आवश्यकता की बात की तब उसे पार्षदों और सफाईकर्मियों की ओर से विरोध झेलना पड़ा। इनका तर्क होता है कि मशीनों से सफाई होने लगेगी तो सफाईकर्मियों की नौकरी खो देंगे।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेेगा अध्ययन
पालिका आयुक्त ने कहा कि हस्तगत सफाई की अपेक्षा मशीनों से होने वाली सफाई की प्रभावशीलता को लेकर हमने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तुलनात्मक अध्ययन के लिए कहा है। जिस भी तरीके से सड़कों पर धूल कम की जा सकती है, हम वही कदम उठाएंगे।

मशीनों पर होने वाले खर्च अधिक
पालिका के एक अधिकारी ने बताया कि आठ बड़ी सफाई मशीनों की खरीदी पर ८.६८ करोड़ रुपए जबकि एक छोटी मशीन की खरीद पर ४७.१० लाख रुपए खर्च किए गए हैं। वहीं एक बड़ी मशीन के रखरखाव पर मासिक खर्च ५.९५ लाख रुपए और छोटी मशीन पर ३.३० लाख रुपए खर्च होते हैं।