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24 ट्रेनों को इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन में बदलने से बचाए 205 करोड़ रुपए

874 किलाेमीटर रेलवे ट्रेक का विद्युतिकरण,दपरे ने सभी क्षेत्रों में सुधार किया

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प्रतिकात्मक फोटो

बेंगलूरु. देश की जीवनरेखा कही जाने वाली भारतीय रेल आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला को अक्षुण्ण रखने, उद्योगों, बिजली संयंत्रों को कच्चे माल की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ तैयार माल, खाद्यान्न और अन्य उत्पादों का समय पर परिवहन सुनिश्चित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। दक्षिण पश्चिम रेलवे ( दपरे ) अपने अधिकार क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
दक्षिण पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक संजीव किशोर ने बताया कि जोन क्षेत्र में रेलवे के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर अब अभूतपूर्व जोर के साथ-साथ पूंजी निवेश भी हो रहा है। आने वाले दिनों में रेलवे उद्योग और यात्रियों के लिए 'पसंदीदा ट्रांसपोर्टर' के रूप में उभरेगा। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2022-23 में दपरे ने विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से ट्रेनों की गतिशीलता में सुधार के लिए कड़े प्रयास किए हैं। भारतीय रेल के सभी क्षेत्रों में, दपरे ने गतिशीलता में 53 प्रतिशत का सुधार किया है। मालगाड़ियों की औसत गति (स्टेबलिंग और यार्डिंग सहित) अप्रेल 2022 में 13.97 किलोमीटर प्रति घंटे था जो बढ़कर अप्रेल 2023 में 21.6 किलाेमीटर प्रति घंटा हो गई। यह अपने आप में जबरदस्त सुधार कहा जा सकता है।
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गदग बाईपास की शुरुआत
गदग में बाइपास के निर्माण से गोवा/हुब्बल्ली से विजयपुरा की ओर आने वाली मालगाड़ियों के इंजन बदलने में लगने वाले समय की बचत हुई है। इससे गदग जंक्शन में प्रवेश करने के लिए मालगाड़ियों की आवश्यकता भी खत्म हो गई। सितम्बर 2019 से शुरू किए गए हुब्बल्ली बाईपास ने हुब्बल्ली स्टेशन में प्रवेश करते समय मालगाड़ियों को रोके रखने से निजात मिली है। इससे हुब्बल्ली जंक्शन से गुजरने वाली कई मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार किया है।
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अब तक का सर्वाधिक विद्युतीकरण
2022-23 में दपरे ने 874 आरकेएम, अब तक का सर्वाधिक विद्युतीकरण करने में सफलता हासिल की है। दपरे के सभी प्रमुख रेलमार्गों का विद्युतीकरण किया जा रहा है। इससे न केवल 2022-23 में डीजल खर्च पर 205 करोड़ रुपए की बचत हुई है, बल्कि रास्ते में कर्षण परिवर्तन की आवश्यकता भी समाप्त हो गई है। 2022-23 में 24 ट्रेनों को इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन में बदला गया।
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दोहरीकरण और नई लाइन की अब तक की सबसे बड़ी कमीशनिंग
वित्त वर्ष 2022-23 में, दपरे ने 228.5 किलाेमीटर रेल लाइन दोहरीकरण और नई लाइन की अब तक की सबसे अधिक कमीशनिंग हासिल की। 2022-23 (228 किलोमीटर) में एक रिकॉर्ड नई लाइन और दोहरीकरण हासिल किया गया। यलहंका - पेनुकोंडा (120 किमी) और हुब्बल्ली-बेंगलूरु (469 किमी) जैसे महत्वपूर्ण मार्गों के दोहरीकरण से समयपालन में सुधार में हुआ है।
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18 घुमाव हटाकर गति बढ़ाई
18 स्थानों पर घुमावों को हटाकर और पीएसआर को हटाकर गति बढ़ाने के ठोस प्रयास किए गए। 732 किलाेमीटर पर, अधिकतम गति बढ़ाकर 110 किमी प्रति घंटा की गई है। वहीं 91.6 किलाेमीटर में गति पर 100 किमी प्रति घंटे तक बढ़ाई गई है। लूप लाइनों पर दपरे क्षेत्र में 437 किलाेमीटर क्षेत्र में गति 10/15 किलाेमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 30 किमी प्रति घंटा कर दी गई।
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कुल 116 ट्रेनों की गति बढ़ाई
2022-23 में कुल 2718 मिनट की बचत करते हुए 116 ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई गई है। उदाहरण के लिए बेंगलूरु और हुब्बल्ली के बीच रानी चेन्नम्मा (16589) को पहले लगभग 7.5 घंटे लगते थे, लेकिन अब सिर्फ 6.5 घंटे लगते हैं।
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6077 क्रैक ट्रेनों का परिचालन
दपरे ने वर्ष 2022-2023 में 6077 क्रैक ट्रेनें चलाई। जबकि वर्ष 2021-2022 में 2503 क्रैक ट्रेने चलाई थीं। क्रैक ट्रेनें एक छाेर से शुरू होने के बाद बिना रुके दूसरे छोर पर पहुंचती है। इससे ट्रेनों के परिचालन में समय काफी कम लगता है। ये ट्रेने कम समय में अधिक दूरी पर अधिक मात्रामें कार्गो का परिवहन करती हैं।