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Russia-Ukraine war ने यहां बदल दी किसानों की जिंदगी

सूरजमुखी की ओर मुड़ गए किसान

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बेंगलूरु. Russia-Ukraine war ने पूरी दुनिया में किसी न किसी रूप में असर डाला है। एक खास बदलाव यहां कल्याण कर्नाटक क्षेत्र मेें देखा जा रहा है जहां मांग बढऩे के साथ ही किसानों ने परम्परागत फसलों को छोडक़र सूरजमुखी की ओर रुख किया है।

इस वर्ष कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में फसल पैटर्न में भारी बदलाव देखा जा रहा है। खरीफ में रायचूर, कोप्पल और यादगीर जिलों में सूरजमुखी की खेती के क्षेत्र में पर्याप्त वृद्धि हुई है। जो लोग मक्का, बंगाल चना, कपास आदि उगाते थे, अब वे सूरजमुखी की ओर रुख कर रहे हैं।

बढ़ा सूरजमुखी का रकबा

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार अकेले रायचूर जिले में 17,000 हेक्टेयर में सूरजमुखी के बीज बोए गए हैं। पिछले साल यह फसल 3,500 हेक्टेयर में उगाई गई थी। यादगीर में सूरजमुखी की खेती का रकबा 30 से बढक़र 150 हेक्टेयर हो गया है।
मालूम हो कि यूक्रेन और रूस मिलकर भारत की 90 प्रतिशत सूरजमुखी तेल की जरूरतों को पूरा करते हैं। भारत ने पिछले साल लगभग 13.2 मिलियन टन खाद्य तेल का आयात किया था। इसमें से सूरजमुखी का तेल लगभग 2-2.2 मिलियन टन था।

रायचूर के कृषि विभाग की संयुक्त निदेशक देविका आर का कहना है कि यह प्रवृत्ति बाजार में सूरजमुखी की बढ़ती मांग और आकर्षक कीमत के कारण है। हो सकता है कि किसान अगले सीजन (रबी) में मूंगफली जैसी तेल वाली फसल का विकल्प चुनें।

यादगीर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक आबिद एसएस का कहना है कि विभाग ने तीन साल के अंतराल के बाद इस साल सूरजमुखी के बीज का वितरण फिर से शुरू किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों को सूरजमुखी उगाने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया है।

सोयाबीन भी हो रहा लोकप्रिय

सोयाबीन एक और फसल है जिसकी लोकप्रियता कल्याण कर्नाटक में बढ़ रही है। कलबुर्गी कृषि के संयुक्त निदेशक रथेंद्रनाथ सुगुर का कहना है कि सोयाबीन की खेती का रकबा पिछले साल के 12,000 हेक्टेयर से बढक़र इस साल 30,000 हेक्टेयर होने की संभावना है। खेती क्षेत्र में वृद्धि का कारण बाजार में मिल रही अच्छी कीमत है और क्षेत्र की मुख्य फसल अरहर दाल के विपरीत, सोयाबीन बारिश का मार झेलने में ज्यादा सक्षम है। परिणामस्वरूप किसान अरहर से सोयाबीन की ओर रुख कर रहे हैं।
बीदर कृषि संयुक्त निदेशक तारामणि जीएच ने कहा कि जिले में सोयाबीन की खेती का रकबा पिछले साल के 1.82 लाख हेक्टेयर से बढक़र इस साल 2.6 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। विभाग भी किसानों को रबी सीजन के दौरान सूरजमुखी उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।