
बेंगलूरु. सीमंधर स्वामी राजेंद्र सूरी संघ, मामूलपेट के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास में गुरु राजेंद्र भवन किलारी रोड में विराजित साध्वी भव्यगुणाश्री ने गुरुदेव के 108 अभिषेक के अवसर पर कहा कि मानव जीवन को सौंदर्य से युक्त करने का काम सद्गुरु करते हैं। किंतु यह अनुपम उपलब्धि केवल सद्गुरु बनाने से प्राप्त नहीं होती है। संसार में चाहे कोई कितना ही बड़ा ज्ञानी हो अथवा ध्यानी, जब तक उसे सद्गुरु प्राप्त नहीं होते तब तक उसका जीवन गरिमा से युक्त नहीं होता।
प्रातःकाल पूर्व दिशा में लालिमा लिए उदित होने वाला सूर्य समस्त ब्रह्माण्ड की आंख बनकर प्रकट होता है। सबको प्रकाशित करता है, जिससे संसार का सौंदर्य दिखता है ।
संसार सागर में अंधेरे और उजाले दोनों हैं। यह जरूरी नहीं कि जो आप अपने इन बाहर खुले हुए नेत्रों से देख रहे हैं, जो दृश्य साफ-साफ दिखाई दे रहा है वह सत्य का ही उजाला हो। उस चमकते हुए उजाले की परत के पीछे छिपा हुआ घना अंधकार भी हो सकता है। इस मानव देह में एक तीसरा ज्ञान चक्षु भी होता है, जिसके द्वारा अंधेरों और उजालों का अंतर समझ आता है। नेमींचंद वेदमुथा ने बताया कि अभिषेक का लाभ शांति बाई तिलोकचंद वाणीगोता परिवार ने लिया।संघ अध्यक्ष मेघराज भंसाली, मांगीलाल वेदमुथा, नेमीचंद वेदमुथा, कांतिलाल गांधीमुथा, दिलीप कुमार कांकरिया ने आभार व्यक्त किया।
Published on:
07 Oct 2023 02:16 pm
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